रायपुर। महाराष्ट्र। कल्पना कीजिए… आपकी जिंदगी भर की बचत नहीं… लेकिन आपके लिए बहुत जरूरी 24 हजार रुपये कहीं गुम हो जाएं. आप हर जगह तलाश करें… फिर उम्मीद छोड़ दें. दो साल बीत जाएं… और फिर एक दिन अचानक कोई कहे… आपके पैसे मिल गए हैं. फिल्मों में ऐसा होता है… लेकिन महाराष्ट्र के वाशिम में यह हकीकत बन गया. कहानी शुरू होती है… अप्रैल 2024 से. महाराष्ट्र का संभाजीनगर बस स्टेशन. एक बुजुर्ग महिला… कासाबाई गायकवाड, साथ में उनके बीमार पति. दोनों सरकारी बस में बैठते हैं. मंजिल थी वाशिम जिले का मालेगांव. करीब चार घंटे का सफर पूरा होता है. दोनों बस से उतर जाते हैं. लेकिन उतरते समय एक छोटी सी थैली बस की सीट पर ही छूट जाती है. बस आगे बढ़ती है. अपने आखिरी पड़ाव वाशिम डिपो पहुंचती है. सभी यात्री उतर जाते हैं।
भारतदिल्ली-एनसीआरछत्तीसगढ़राज्यविश्वखेलव्यापारमनोरंजनEPaperप्रौद्योगिकीलाइफ स्टाइलअन्य खबरें BREAKING Pauri Garhwal: मिशन शक्ति कार्यशाला में कानून और अधिकारों की दी जानकारी ₹ 94.77 Telangana: आदमी पर पत्नी को प्रताड़ित करने का आरोप; समुदाय गिरफ्तारी चाहता है ₹ 146.35 Pauri Garhwal: दून हैचरीज मामले में बड़ा फैसला, जांच पूरी होने तक निर्माण बंद ₹ 79.07 अतीक अहमद की कब्र के पास दफनाया जाएगा बेटा अबान, जुमे की नमाज के बाद किया जाएगा सुपुर्द-ए-खाक ₹ 87.64 बेमेतरा के इस गांव में हत्या के बाद तनाव का माहौल ₹ 95.02 Panipat: हाईवे टोल प्लाजा पर कर्मचारियों का प्रदर्शन, यातायात प्रभावित ₹ 167.02 Telangana: अंतरराज्यीय कैब चोर पकड़ा गया, तीन वाहन बरामद ₹ 112.34 Palwal: पलवल में जलभराव से बढ़ी परेशानी, व्यवस्था पर उठे सवाल ₹ 161.33 Telangana: बीआरएस कैबिनेट ने जीओ 111 को निरस्त करने का निर्णय लिया था ₹ 130.94 Dehradun: एनसीसी के आधुनिकीकरण को लेकर मुख्यमंत्री से हुई अहम बातचीत ₹ 173.65 Home/भारत/दादी को 2 साल बाद मिला… भारत दादी को 2 साल बाद मिला बस में छूटा 24 हजार रूपए, कंडक्टर की हो रही तारीफ ₹ 67.65 Nil dhankar7 Aug 2026 7:46 AM Follow us on Preferred on पढ़े पूरी खबर महाराष्ट्र। कल्पना कीजिए… आपकी जिंदगी भर की बचत नहीं… लेकिन आपके लिए बहुत जरूरी 24 हजार रुपये कहीं गुम हो जाएं. आप हर जगह तलाश करें… फिर उम्मीद छोड़ दें. दो साल बीत जाएं… और फिर एक दिन अचानक कोई कहे… आपके पैसे मिल गए हैं. फिल्मों में ऐसा होता है… लेकिन महाराष्ट्र के वाशिम में यह हकीकत बन गया. कहानी शुरू होती है… अप्रैल 2024 से. महाराष्ट्र का संभाजीनगर बस स्टेशन. एक बुजुर्ग महिला… कासाबाई गायकवाड, साथ में उनके बीमार पति. दोनों सरकारी बस में बैठते हैं. मंजिल थी वाशिम जिले का मालेगांव. करीब चार घंटे का सफर पूरा होता है. दोनों बस से उतर जाते हैं. लेकिन उतरते समय एक छोटी सी थैली बस की सीट पर ही छूट जाती है. बस आगे बढ़ती है. अपने आखिरी पड़ाव वाशिम डिपो पहुंचती है. सभी यात्री उतर जाते हैं. Also Read – अतीक अहमद की कब्र के पास दफनाया जाएगा बेटा अबान, जुमे की नमाज के बाद किया जाएगा सुपुर्द-ए-खाक अब बारी थी रोज की उस प्रक्रिया की, जो शायद ज्यादातर लोग जानते भी नहीं. बस कंडक्टर राजू वाणी बस के अंदर चक्कर लगा रहे थे. देख रहे थे कि कहीं कोई सामान तो नहीं छूट गया. तभी उनकी नजर उस छोटी सी थैली पर पड़ी. थैली खोली तो अंदर नोटों की गड्डी थी. नोट गिने गए तो पूरे 24 हजार रुपये थे. साथ में एक मेडिकल पर्ची भी थी. जिस पर लिखा था- कासाबाई गायकवाड. राजू वाणी चाहते तो थैली जमा कर अपना काम खत्म मान लेते. लेकिन उन्होंने उससे कहीं ज्यादा किया. करीब एक घंटे तक बस स्टेशन पर इंतजार किया. पूछताछ केंद्र में सूचना छोड़ी. मेडिकल पर्ची पर लिखे नंबर पर फोन भी किया. लेकिन न कोई आया, न किसी से संपर्क हो सका. दिन बीते… हफ्ते बीते, महीने बीते. और देखते ही देखते दो साल गुजर गए. इधर कासाबाई गायकवाड भी शायद यह मान चुकी थीं कि उनके पैसे अब कभी नहीं मिलेंगे. लेकिन कहते हैं कि ईमानदारी अगर जिंदा हो तो किस्मत भी एक दिन दरवाजा जरूर खटखटाती है. दो दिन पहले राजू वाणी फिर ड्यूटी पर थे. इस बार बस अकोला से वाशिम जा रही थी. एक बुजुर्ग महिला बस में चढ़ीं. उन्होंने मालेगांव का टिकट मांगा. 75 साल से ज्यादा उम्र होने के कारण मुफ्त यात्रा के लिए आधार कार्ड दिखाना था.राजू वाणी ने आधार कार्ड हाथ में लिया. नाम पढ़ा- कासाबाई गायकवाड. यही वह नाम था, जो दो साल पहले उस मेडिकल पर्ची पर लिखा मिला था. राजू वाणी ने तुरंत महिला से पूछा कि क्या कभी आपके पैसे बस में खोए थे? महिला पहले चौंकी. फिर बोलीं कि हां… दो साल पहले 24 हजार रुपये खो गए थे. बस… यहीं से कहानी ने ऐसा मोड़ लिया… जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. राजू वाणी महिला को सीधे वाशिम डिपो लेकर पहुंचे. वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी बात बताई. रिकॉर्ड खंगाले गए. तस्दीक हुई. और फिर दो साल से सुरक्षित रखे गए 24 हजार रुपये कासाबाई को लौटा दिए गए. पैसे हाथ में आते ही बुजुर्ग महिला की आंखें भर आईं.







