बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में वन विभाग ने अवैध लकड़ी कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम अंगारी में वन, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम के साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान ग्राम पंचायत की सरपंच के पति अश्विनी डड़सेना के ठिकाने से बड़ी मात्रा में अवैध रूप से संग्रहित सागौन की लकड़ी, महंगे फर्नीचर, एक मेटाडोर और लकड़ी काटने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें जब्त की गईं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार जब्त सामग्री की कीमत 10 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि लकड़ी की गिनती, माप और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वास्तविक कीमत और मात्रा का खुलासा किया जाएगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से ग्राम अंगारी में अवैध रूप से सागौन लकड़ी के भंडारण और परिवहन की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों का सत्यापन करने के बाद वन विभाग ने राजस्व और पुलिस विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद अश्विनी डड़सेना के परिसर में दबिश दी गई, जहां कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान परिसर से बड़ी मात्रा में सागौन और अन्य प्रजातियों की लकड़ी से बने फर्नीचर बरामद किए गए। वन विभाग ने कार्रवाई के दौरान सागौन और खम्हार की लकड़ी से बने कुल 44 फर्नीचर जब्त किए हैं। इनमें दरवाजे, चौखट, पल्ले, टेबल, कुर्सियां, टीवी यूनिट और अन्य लकड़ी के सामान शामिल हैं। इसके अलावा मौके से 29 नग सागौन के लट्ठे और 16 नग सागौन की डेंगरी भी बरामद की गई।
संयुक्त टीम ने घर के बाहर खड़ी मेटाडोर क्रमांक सीजी 24 जे 0496 की भी जांच की। वाहन से दो नग चिरान लकड़ी बरामद हुई, जिसे जब्त कर लिया गया। इसके साथ ही मौके से लकड़ी काटने में उपयोग होने वाले कटर, ड्रिल मशीन और अन्य उपकरण भी बरामद किए गए। अधिकारियों का मानना है कि इन उपकरणों का उपयोग लकड़ी की कटाई और प्रसंस्करण में किया जा रहा था। जांच के दौरान वन अमले को महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसके आधार पर टीम ने घर से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित खेत में भी तलाशी ली। वहां छिपाकर रखे गए सागौन के लट्ठे और डेंगरी भी बरामद किए गए। वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि बरामद लकड़ी का स्रोत क्या है, इसे कहां से लाया गया और इसके लिए आवश्यक वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। लकड़ी की प्रजाति, मात्रा और परिवहन संबंधी सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।
बालोद वन परिक्षेत्र अधिकारी सरोज कुमार ने बताया कि जब्त सामग्री की गिनती, माप और मूल्यांकन का कार्य जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बरामद लकड़ी की वास्तविक मात्रा और बाजार कीमत कितनी है। यदि जांच में वन अपराध की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ वन अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनी धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि अश्विनी डड़सेना की पत्नी वर्तमान में ग्राम अंगारी की निर्वाचित सरपंच हैं। जनप्रतिनिधि के परिवार से जुड़े व्यक्ति के यहां हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे गांव और जिले में मामले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह शिकायतों और जांच के आधार पर की गई है तथा जांच निष्पक्ष रूप से जारी रहेगी।







