अमलेश्वर। अमलेश्वर में स्थित मुख्य मुक्तिधाम, जो कभी मृत आत्माओं को मोक्ष की अंतिम विदाई देने का पवित्र स्थल था, आज कचरे, गंदगी और उपेक्षा का शिकार होकर बदहाल हो चुका है। यहाँ की स्थिति इतनी दयनीय है कि अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिजन नाक-मुंह ढककर और मन में दुख के साथ समय बिताने को मजबूर हैं।
अमलेश्वर का मुक्तिधाम (श्मशान घाट) भारी दुर्दशा, प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना कर रहा हैं। यहाँ अव्यवस्थित
बदबू भरे रास्ते, और गंदगी के कारण अंतिम संस्कार करने आए लोगों को भारी परेशानी होती है। बाथरूम पूर्ण रूप से जर्जर हो चुका है तो एकमात्र बोरिंग है वह भी बंद पड़ा है। मुक्तिधाम में एकमात्र सीमेंटनुमा छोटा सा स्थान जहां पर लाश को जलाने का कार्य किया जाता है वही दफन करने के लिए कोई स्वच्छ स्थान नहीं चारों ओर गंदगी का आलम है। मृत शरीर को रखने के लिए कोई जगह नहीं है। बैठने की व्यवस्था नहीं है।वर्षों पुराने बने मुक्तिधाम जर्जर हालत में हैं और उनकी मरम्मत नहीं हो रही है।
स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि के उदासीनता ने इस मुक्तिधाम को ‘कचरा धाम’ में तब्दील कर दिया है। चारों ओर फैली गंदगी, आवारा पशुओं का जमावड़ा और असहनीय दुर्गंध न केवल मृतकों के प्रति सम्मान को ठेस पहुँचाती है, बल्कि मानवता को भी ललकारती है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं, लेकिन अमलेश्वर पालिका और जनप्रतिनिधियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। शासकीय व्यवस्था की इस उदासीनता पर सवाल उठते हैं कि क्या हम अपने मृतकों के प्रति इतने असंवेदनशील हो गए हैं?
वर्जन
अमलेश्वर पालिका अध्यक्ष दयानंद सोनकर ने कहा कि मुक्तिधाम को व्यवस्थित रूप से बनाया जाएगा जहां-जहां पर समस्या है उसमें सुधार कार्य किया जायेगा
इसके लिए बजट आ गया है बहुत जल्दी ही इसका कार्य प्रारंभ किया जाएगा
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अमलेश्वर पालिका के सफाई इंस्पेक्टर अतीक खान ने कहा कि समय समय पर सफाई करवाते है अमलेश्वर मुक्ति धाम की सफाई की जाती है तथा अगर कोई दाह (लाश) लेकर आए उसके लिए गड्ढा भी कर के दिया जाता है।
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