भिलाई। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को लेकर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। पर्यावरण प्रबंधन विभाग द्वारा मानव संसाधन विकास केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और प्रकृति आधारित समाधानों पर विशेष चर्चा की गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, पर्यावरण विशेषज्ञों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा घोषित थीम “Inspired by Nature for Climate, For Our Future” के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रकृति संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करना था।
पर्यावरण संरक्षण को बताया सामूहिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम की शुरुआत महाप्रबंधक प्रभारी (पर्यावरण प्रबंधन) श्रीमती उमा कटोच के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने भिलाई इस्पात संयंत्र की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।
इसके बाद महाप्रबंधक (पर्यावरण प्रबंधन) संजय शर्मा ने उपस्थित सभी लोगों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई।
पर्यावरणीय उपलब्धियों की दी जानकारी
कार्यक्रम में महाप्रबंधक (पर्यावरण प्रबंधन) के. प्रवीण ने भिलाई इस्पात संयंत्र के पर्यावरणीय प्रदर्शन पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
उन्होंने बताया कि संयंत्र लगातार निम्न क्षेत्रों में सुधार के लिए कार्य कर रहा है:
- वायु प्रदूषण नियंत्रण
- जल प्रदूषण नियंत्रण
- जल संरक्षण
- संसाधन दक्षता
- अपशिष्ट प्रबंधन
- ऊर्जा संरक्षण
इसके साथ ही उन्होंने बीएसपी की डी-कार्बोनाइजेशन योजना पर भी प्रकाश डाला।
हरित तकनीकों पर विशेष फोकस
प्रस्तुति के दौरान बताया गया कि भविष्य में कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं:
- अक्षय ऊर्जा का अधिक उपयोग
- ऊर्जा दक्षता में सुधार
- कच्चे माल के बेहतर उपयोग की रणनीति
- कार्बन कैप्चर और उपयोग तकनीक
- हाइड्रोजन आधारित इस्पात निर्माण की दिशा में प्रयास
इन पहलों का उद्देश्य उद्योग और पर्यावरण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करना है।
AI और पर्यावरण पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एवं एनआईटी रायपुर की प्रोफेसर डॉ. शोभा लता सिन्हा ने पर्यावरणीय चुनौतियों और आधुनिक तकनीकों की भूमिका पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि:
- जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक चुनौती बन चुका है।
- अक्षय ऊर्जा भविष्य का आधार है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर्यावरणीय प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
- तकनीकी विकास और प्रकृति संरक्षण के बीच संतुलन आवश्यक है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने दिया हरित भविष्य का संदेश
मुख्य अतिथि बी. के. बेहेरा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रकृति का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने सभी लोगों से पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहने और हरित भविष्य के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
वहीं कार्यकारी मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (सर्विसेज) पी.आर. भल्ला ने कर्मचारियों की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सौरभ उपाध्याय ने भिलाई इस्पात संयंत्र की पर्यावरणीय पहलों की सराहना करते हुए कहा कि बड़े औद्योगिक संस्थानों को सतत विकास का उदाहरण बनना चाहिए।
विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने भी दिखाई सहभागिता
कार्यक्रम के दौरान कई आकर्षक गतिविधियों का आयोजन किया गया:
- पर्यावरण प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
- पर्यावरण जागरूकता गीत
- नुक्कड़ नाटक
- पर्यावरण विषयक प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण
बीएसपी विद्यालयों के विद्यार्थियों और कर्मचारियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरणादायक पहल
भिलाई इस्पात संयंत्र का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक भी रहा। जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच इस प्रकार की पहल समाज में जागरूकता बढ़ाने और हरित विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस पर दिया गया यह संदेश स्पष्ट है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं, यदि सभी मिलकर जिम्मेदारी के साथ प्रयास करें।





