कानपुर, अगर आप इन दिनों किसी बड़े होटल में ठहरने या खाने का प्लान बना रहे हैं, तो जेब पहले से ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। वजह है पीएनजी आपूर्ति में भारी कटौती, जिसने होटल मैनेजमेंट की पूरी व्यवस्था हिला दी है। कानपुर के बड़े होटलों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की सप्लाई करीब 45 फीसदी तक घटा दी गई है। होटल संचालकों के अनुसार, अब सिर्फ 55 फीसदी गैस के सहारे किचन चलाना पड़ रहा है, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं।
पहले जहां सभी बर्नर एक साथ चलते थे, अब कई जगह आधे चूल्हे ही जल रहे हैं। होटलों के किचन स्टाफ का कहना है कि उन्हें अब हर डिश सोच-समझकर बनानी पड़ रही है। जिन व्यंजनों में गैस ज्यादा लगती है, उन्हें मेन्यू से हटाया जा रहा है या सीमित किया जा रहा है। इसका असर होटल में मिलने वाले विकल्पों पर साफ दिख रहा है। कई होटलों में ग्राहकों को पहले जैसा पूरा मेन्यू नहीं देने की तैयारी है।
खर्च घटाने के लिए होटलों में एक ही रेस्टोरेंट संचालन की तैयारी
खर्च कम करने के लिए होटल प्रबंधन नए कदम उठा रहा है। माल रोड स्थित लैंडमार्क के एमडी विकास मल्होत्रा कहते हैं कि अब एक ही रेस्टोरेंट चलाने की तैयारी है, अबतक तीन रेस्टोरेंट चला जा रहे हैं, इससे स्टाफ और गैस की खपत दोनों कम की जा रही है। इसी तरह अन्य होटलों में भी एक रेस्टोरेंट चलाने की तैयारी की जा रही है।
मुफ्त ब्रेकफास्ट सुविधा बंद करने पर विचार
पीएनजी की आपूर्ति में कटौती से होटलों में मुफ्त ब्रेकफास्ट सुविधा भी अब खतरे में है। हर्ष नगर स्थित एक होटल के जीएम अनुराग दूबे कहते हैं कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो इसे बंद करना पड़ सकता है। इससे ग्राहकों का कुल खर्च बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें अलग से नाश्ते के लिए भुगतान करना होगा।
बिस्कुट-नमकीन इकाइयों में सिर्फ तीन दिन ही काम
पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) आपूर्ति में कटौती का असर बिस्कुट और नमकीन इकाइयों पर पड़ने लगा है। 45 फीसदी आपूर्ति कम होने से कारोबारियों के सामने गंभीर संकट है। ऑर्डर पूरे करने के लिए इकाइयों को अब सिर्फ तीन दिन ही चलाने की तैयारी है। इससे उत्पादन ठप होने का खतरा साफ नजर आ रहा है।
पीएनजी कंपनियों ने बिस्कुट और नमकीन इकाइयों को सिर्फ 55 फीसदी ही गैस आपूर्ति करने का निर्णय लिया है। कानपुर बिस्कुट-नमकीन एसोसिएशन के अध्यक्ष जसवंत सिंह का कहना है कि मौजूदा समय में सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही इकाइयां चलाई जा सकती हैं। हालांकि अगर आगे भी ऐसा ही हाल रहा तो मशीनें बंद करनी पड़ेंगी। कारोबारियों का कहना है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बीच ईंधन संकट ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। ऐसे में उत्पादों के दाम बढ़ाना लगभग तय माना जा रहा है।
जीटी रोड स्थित प्रिस्टीन के एमडी विश्वनाथ गुप्ता कहते हैं कि लॉन्ड्री सेवाओं में भी बदलाव किया जा रहा है। गैस से चलने वाली मशीनों की जगह अब इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ गया है। इससे बिजली का बिल बढ़ रहा है और कुल लागत में इजाफा हो रहा है। यह संकट लंबा चला तो असर और गहरा होगा। गैस की कमी ने पूरे होटल उद्योग को दबाव में ला दिया है और आने वाले समय में इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब और सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा।
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