सार्वजनिक धन से चल रही केंद्र सरकार से लेकर जिला स्तर तक की योजनाओं और कार्यक्रम के नवीनतम और सटीक आंकड़े अब एक प्लेटफार्म पर मिल सकेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार नई नीति तैयार कर रही है। इस नीति में सबसे बड़ा प्रावधान यह किया गया है कि जिस भी योजना या कार्यक्रम पर सार्वजनिक धन खर्च हो रहा है, उसके आंकड़े उपलब्ध कराने की अनिवार्यता होगी। भले ही वह राज्य सरकार हो, केंद्र शासित प्रदेश या फिर कोई नगर या ग्रामीण निकाय।
केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय ने नीति के मसौदे पर विभिन्न पक्षों से राय मशविरा लेने की प्रक्रिया करीब-करीब पूरी कर ली है। इसके बाद अगले कुछ महीनों में नेशनल पॉलिसी ऑन ऑफिशियल स्टैटिक्स (एनपीओएस) को अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया जा सकता है। नई नीति के अनुसार देश भर के सार्वजनिक धन से चल रही योजनाओं और कार्यक्रमों के आंकड़ों को एकत्र करने के लिए एक एकीकृत डाटा सिस्टम (आईडीएस) तैयार किया जाएगा।
यह हाइटेक तकनीक जैसे एआई और मशीन लर्निंग से लैस होगा। इससे फायदा यह होगा कि इसमें आंकड़े एआई के इस्तेमाल से अपडेट भी होते रहेंगे। इससे हर वक्त ताजा आंकड़ों का मिलना सुनिश्चित होगा। इसमें एक डिजिटल सर्वे प्लेटफार्म तैयार किया जाएगा। आंकड़ों के संग्रह के लिए एक डाटा भंडार केंद्र भी होगा। इसमें आंकड़ों को प्रोसेसिंग की सुविधा भी होगी। एकीकृत डाटा सिस्टम पर सभी प्रकार के आंकड़ों को एक स्थान पर तलाश करने की सुविधा दी जाएगी ताकि योजनाएं तैयार करते समय नीति निर्माताओं को आसानी हो।
इसके अलावा आंकड़ों के दूसरे देशों को आदान-प्रदान के लिए इंटरनेशनल डाटा एक्सचेंज नियम भी तैयार किए जाएंगे।नीति में कहा गया कि यह व्यवस्था 2008 में बने आंकड़ों के संग्रह अधिनियम के तहत की जा रही है जिसमें केंद्र एवं राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल होना जरूरी है। जहां भी सार्वजनिक धन इस्तेमाल होता है, उन पर यह नीति लागू होगी। उससे जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराने होंगे। सरकार एजेंसियों को सटीक एवं ताजे आंकड़ों की उपलब्धता से सामाजिक चुनौतियों के निराकरण के लिए लक्ष्य निर्धारित करने में भी मदद मिलेगी।
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