गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में कौशांबी थाने के पुलिसकर्मी झुग्गियों में रहने वाले लोगों की नागरिकता की जांच एक ‘अनोखे’ अंदाज में करते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स इस पर तंज कसते हुए कह रहे हैं कि गाजियाबाद पुलिस के पास ऐसी ‘मशीन’ आ गई है जो इंसान की नागरिकता बता देती है।
क्या है वायरल वीडियो में? वायरल वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी एक झुग्गी बस्ती में संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ कर रहे हैं। वीडियो के दौरान एक पुलिसकर्मी वहां मौजूद शख्स से पूछता है, “बांग्लादेश से तो नहीं हो?” जब वह व्यक्ति इनकार करता है, तो पुलिसकर्मी मजाकिया या डराने वाले लहजे में कहता है— “मशीन लगाओ इसकी पीठ पर।”
इसके बाद पुलिसकर्मी अपना मोबाइल फोन उस व्यक्ति की पीठ पर सटाता है और कुछ ही सेकंड में कहता है— “मशीन तो इसे बांग्लादेशी बता रही है।” यह वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर आया, यूजर्स ने इसे पुलिस का गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए ट्रोल करना शुरू कर दिया।
गाजियाबाद पुलिस की सफाई: वीडियो पर विवाद बढ़ता देख गाजियाबाद पुलिस ने अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल से सफाई पेश की है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह रूटीन चेकिंग का हिस्सा था। पोस्ट में लिखा गया:
“अपराध नियंत्रण के प्रयासों के क्रम में अस्थायी बस्तियों और झुग्गियों में संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ और सत्यापन की प्रक्रिया समय-समय पर की जाती है। इसी क्रम में कौशांबी पुलिस ने पूछताछ और सत्यापन की कार्रवाई की थी, जिसमें सत्यता परीक्षण के लिए लोगों से दस्तावेज़ मांगे गए थे।”
सत्यापन के तरीके पर सवाल: हालांकि पुलिस ने इसे नियमित जांच बताया है, लेकिन जिस तरह से ‘मोबाइल फोन’ को नागरिकता जांचने वाली मशीन बताकर लोगों के बीच भय या भ्रम पैदा किया गया, उसकी काफी आलोचना हो रही है। जानकारों का कहना है कि सत्यापन की एक कानूनी प्रक्रिया होती है और इस तरह के तरीके अपनाना पुलिस की छवि को धूमिल करता है।
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