संजीव यादव की सामाजिक पहल को आगे बढ़ाते हुए मनीषा कुंडे ने की शुरुआत, पिता सुरेश समुद्रे ने वृद्धाश्रम पहुंचकर किया सेवा कार्य
रायपुर। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कभी-कभी एक छोटी-सी पहल भी बड़ी सामाजिक जागरूकता का माध्यम बन जाती है। इसी उद्देश्य के साथ लक्ष्य वेलफेयर फाउंडेशन सोसाइटी के संस्थापक एवं संचालक संजीव यादव समाज में एक ऐसी सोच विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसमें किसी प्रियजन के निधन के पश्चात उनकी स्मृति में होने वाले पारंपरिक आयोजनों के साथ-साथ जरूरतमंदों की सेवा, बुजुर्गों का सम्मान और मानवता के कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाए।
संजीव यादव का मानना है कि किसी दिवंगत परिजन के प्रति प्रेम, सम्मान और श्रद्धा केवल पारंपरिक आयोजनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी स्मृति में ऐसा सेवा कार्य भी किया जा सकता है, जिससे किसी जरूरतमंद के जीवन में खुशियां आएं और किसी बुजुर्ग को अपनापन एवं सहारा मिले। इसी विचार को समाज तक पहुंचाने और लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से लक्ष्य वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा ऐसी सकारात्मक पहल को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसी सामाजिक सोच को वास्तविक रूप देने की दिशा में लक्ष्य वेलफेयर फाउंडेशन की सक्रिय सदस्य श्रीमती मनीषा कुंडे ने अपने परिवार के साथ एक सराहनीय पहल की शुरुआत की। उनके पिता श्री सुरेश समुद्रे जी ने इस विचार को आत्मसात करते हुए अपनी माता स्वर्गीय श्रीमती सुखिया समुद्रे जी की स्मृति में पारंपरिक मृत्यु भोज के स्थान पर सेवा कार्य करने का निर्णय लिया और स्वयं इस पहल को साकार किया।
दिनांक 15 अक्टूबर 2026 को श्री सुरेश समुद्रे जी एवं परिवारजन सुंदर नगर स्थित वृद्धाश्रम (प्रशामक देखरेख गृह, ॐ सोसाइटी के पास) पहुंचे। यहां वृद्धजनों को शॉल, अनाज एवं अन्य आवश्यक उपयोगी सामग्री भेंट की गई। परिवारजनों ने बुजुर्गों के साथ आत्मीय समय बिताया, उनसे बातचीत की, उनका हालचाल जाना और उनका स्नेह एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।
यह पहल केवल सामग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदना और अपनत्व व्यक्त करने का एक भावपूर्ण प्रयास था, जिन्हें जीवन के इस पड़ाव पर सबसे अधिक आवश्यकता प्रेम, समय और साथ की होती है।
लक्ष्य वेलफेयर फाउंडेशन का स्पष्ट मानना है कि किसी की धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक परंपरा को ठेस पहुंचाना इस पहल का उद्देश्य नहीं है। संस्था चाहती है कि समाज में लोगों को एक सकारात्मक विकल्प के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि प्रत्येक परिवार अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार अपने प्रियजनों की स्मृति में वृद्धाश्रम, अनाथालय, गरीब बच्चों की शिक्षा, जरूरतमंद परिवारों को भोजन एवं असहाय लोगों की सहायता जैसे कार्य कर सके।
इस अवसर पर संस्था के संस्थापक एवं संचालक संजीव यादव ने कहा कि समाज में बदलाव केवल भाषणों और संदेशों से नहीं आता, बल्कि जब कोई व्यक्ति स्वयं आगे बढ़कर उदाहरण प्रस्तुत करता है, तभी दूसरे लोग भी प्रेरित होते हैं। श्रीमती मनीषा कुंडे ने अपने परिवार के माध्यम से जिस सोच को आगे बढ़ाया और उनके पिता श्री सुरेश समुद्रे जी ने जिस संवेदनशीलता के साथ इसे साकार किया, वह निश्चित रूप से समाज के लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि यह पहल किसी एक परिवार तक सीमित न रहे, बल्कि धीरे-धीरे सामाजिक जागरूकता का रूप ले। हम चाहते हैं कि लोग अपने परिवार की स्मृतियों को मानव सेवा से जोड़ें और जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां बांटने का संकल्प लें।
संस्था समाज के सभी परिवारों से अपील करती है कि वे परंपराओं का सम्मान करते हुए अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्यों को भी जीवन का हिस्सा बनाएं। किसी बुजुर्ग को सम्मान देना, किसी भूखे को भोजन कराना, किसी गरीब बच्चे की शिक्षा में सहयोग करना या किसी असहाय परिवार का सहारा बनना भी मानवता की सच्ची मिसाल है।
संस्था का मानना है कि किसी दिवंगत आत्मा की स्मृति में किया गया एक छोटा-सा सेवा कार्य भी किसी जरूरतमंद के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।





