छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन तहसील में प्रशासनिक फेरबदल ने इन दिनों चर्चाओं को तेज कर दिया है। उपतहसील जामगांव आर में पदस्थ अतिरिक्त तहसीलदार ममता टावरी को पाटन तहसीलदार का प्रभार दिए जाने के महज एक दिन बाद ही उनका तबादला नारायणपुर जिले कर दिया गया। एक ही दिन के अंतराल में जिम्मेदारी और तबादले के इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं।
बुधवार को जारी प्रशासनिक आदेश में ममता टावरी का स्थानांतरण नारायणपुर जिले किया गया। खास बात यह है कि मंगलवार को ही उन्हें पाटन तहसीलदार का प्रभार सौंपा गया था।
एक दिन का प्रभार, अगले दिन तबादला
पाटन तहसीलदार पवन ठाकुर के दुर्ग स्थानांतरण के बाद राजस्व विभाग ने मंगलवार को ममता टावरी को पाटन तहसीलदार का प्रभार दिया था।
नई जिम्मेदारी संभालने की प्रक्रिया शुरू ही हुई थी कि अगले दिन उनके नारायणपुर तबादले का आदेश सामने आ गया।
इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, तबादले के पीछे शासन की ओर से आधिकारिक तौर पर क्या कारण बताया गया है, यह संबंधित आदेश से स्पष्ट होना बाकी है।
स्थानीय स्तर पर शिकायतों की चर्चा
स्थानीय स्तर पर ममता टावरी के कार्यव्यवहार और राजस्व मामलों के निराकरण को लेकर शिकायतों की चर्चा भी सामने आती रही है। खबर के मुताबिक, कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और दुर्ग सांसद विजय बघेल के समक्ष शिकायत किए जाने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इन शिकायतों और तबादले के बीच सीधे संबंध की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल प्रशासनिक हलकों में चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है।
पाटन तहसील में पहले से लंबित हैं कई राजस्व मामले
पाटन तहसील कार्यालय में पहले से ही कई महत्वपूर्ण राजस्व प्रकरण लंबित बताए जा रहे हैं। इनमें जमीन से जुड़े मामलों के साथ-साथ नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और भूमि विवाद जैसे प्रकरण शामिल हैं।
ऐसे में लगातार अधिकारियों के बदलने से इन मामलों के निराकरण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों और जमीन से जुड़े पक्षकारों के लिए तहसील कार्यालय में समय पर सुनवाई और प्रकरणों का निपटारा बेहद महत्वपूर्ण होता है। अधिकारी बदलने के कारण यदि प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है या सुनवाई में देरी होती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है।
स्थायी व्यवस्था की उठ रही जरूरत
पाटन तहसील में लगातार हो रहे प्रशासनिक बदलाव के बीच अब स्थायी व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। स्थानीय स्तर पर उम्मीद है कि शासन जल्द ही तहसीलदार की नियमित नियुक्ति कर राजस्व व्यवस्था को स्थिरता देगा।
खासकर लंबित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और जमीन विवादों का समयबद्ध निराकरण प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
फिलहाल एक दिन पहले तहसीलदार का प्रभार और अगले ही दिन तबादला पाटन क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि शासन पाटन तहसील में अगली नियुक्ति कब करता है और लंबित राजस्व मामलों के निराकरण के लिए क्या व्यवस्था बनाई जाती है।







