बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। रेंज साइबर थाना पुलिस ने म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेनदेन करने वाले गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया कि छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के दो खातों में महज 25 दिनों के भीतर 2 करोड़ 32 लाख रुपए से ज्यादा का लेनदेन हुआ। पुलिस जांच में इन खातों का कनेक्शन देश के 12 से ज्यादा राज्यों में दर्ज 50 से अधिक साइबर अपराधों से भी सामने आया है।
इन मामलों में करीब 4 करोड़ रुपए की ठगी की रकम के लेनदेन की जानकारी पुलिस को मिली है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
कमीशन के लालच में दिए जाते थे बैंक खाते
पुलिस की जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य आम लोगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले मोटे कमीशन का लालच देते थे। खाताधारकों को करीब 20 से 25 हजार रुपए तक कमीशन देने की बात सामने आई है।
इसके अलावा प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर करीब 2.8 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का लालच भी दिया जाता था।
खाता उपलब्ध कराने के बाद खाताधारक अपने बैंक खाते से जुड़ी नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग की जानकारी या एक्सेस आरोपियों को दे देते थे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को जमा करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
25 दिन में 2.32 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन
मामले का खुलासा तब हुआ जब छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की मंगला शाखा के दो संदिग्ध खातों में असामान्य लेनदेन सामने आया।
बैंक मैनेजर आरती कुरील ने पुलिस को जानकारी दी कि इन खातों में बेहद कम समय में करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ था। बैंक ऑडिट के दौरान इन खातों से धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर करने और निकालने से जुड़े संकेत मिले।
बैंक को आशंका हुई कि साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए इन खातों को किराए पर उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद बैंक की ओर से रेंज साइबर थाने में शिकायत की गई।
पुलिस को जांच के लिए बैंक खातों से जुड़े जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड भी सौंपे गए।
ऐसे काम करता था पूरा नेटवर्क
पुलिस जांच के मुताबिक गिरोह का तरीका बेहद व्यवस्थित था।
- लोगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए कमीशन का लालच दिया जाता था।
- खाता उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को 20 से 25 हजार रुपए तक देने की बात सामने आई।
- हर ट्रांजेक्शन पर 2.8 प्रतिशत हिस्सेदारी का लालच दिया जाता था।
- बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम जमा करने के लिए किया जाता था।
- रकम आने के बाद उसे तेजी से दूसरे खातों में ट्रांसफर या निकाल लिया जाता था।
- पुलिस ने ऐसे खातों के नेटवर्क को म्यूल बैंक अकाउंट सिंडिकेट के रूप में चिन्हित किया है।
12 से ज्यादा राज्यों के साइबर अपराधों से कनेक्शन
जांच में गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों का संबंध सिर्फ बिलासपुर तक सीमित नहीं मिला। पुलिस के मुताबिक इन खातों से जुड़े लेनदेन का कनेक्शन 12 से ज्यादा राज्यों में दर्ज 50 से अधिक साइबर अपराधों से सामने आया है।
इन मामलों में करीब 4 करोड़ रुपए की ठगी की रकम के लेनदेन की जानकारी मिली है। इससे पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है।
6 आरोपी गिरफ्तार, कई लोगों की भूमिका की जांच
रेंज साइबर पुलिस ने जांच के दौरान खाता धारक अजय कुमार सोनी को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद पुलिस को नरेंद्र कुर्रे और रायपुर निवासी देवेश कुमार दास उर्फ रोबिन के बारे में जानकारी मिली।
पुलिस के अनुसार दोनों बैंक खातों के नेटवर्क से जुड़े हुए थे। इसके बाद मामले में कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन, चेकबुक और पैन कार्ड समेत अन्य सामग्री बरामद की है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
अभिलाष का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया
जांच के दौरान आरोपी अभिलाष डेनियल का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है, जो गो-तस्करी से जुड़ा बताया गया है।
वहीं देवेश कुमार दास उर्फ रोबिन के बारे में बताया गया कि वह सॉफ्टवेयर से जुड़ा काम करता है। आरोपी नरेंद्र कुर्रे संविदा कर्मचारी है, हालांकि वह किस विभाग में कार्यरत है, इसकी जानकारी जांच के स्तर पर स्पष्ट नहीं हुई है।
पुलिस खंगाल रही है पूरे सिंडिकेट का नेटवर्क
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन बैंक खातों के जरिए कितने लोगों से साइबर ठगी की रकम का लेनदेन किया गया और इस नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल हैं।
मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि बैंक खाता, मोबाइल बैंकिंग या नेट बैंकिंग की जानकारी किसी लालच में दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध कराना कितना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में इस्तेमाल होने वाले ऐसे खाते खाताधारक को भी कानूनी जांच के दायरे में ला सकते हैं।
बिलासपुर पुलिस की जांच अब गिरोह के अन्य सदस्यों, साइबर ठगी की रकम के स्रोत और उसके अंतिम ठिकाने तक पहुंचने पर केंद्रित है।







