छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस आरक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। उतई थाना क्षेत्र के सेलूद में एक युवक के परिजन से कथित तौर पर 12 लाख रुपये लिए गए। आरोप है कि आरोपी ने युवक को पुलिस आरक्षक के पद पर भर्ती कराने का भरोसा दिलाया था। जब नौकरी नहीं लगी और रकम भी वापस नहीं मिली, तो पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की।
शिकायत के बाद उतई पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उमेश दास मानिकपुरी और राजेश वर्मा के रूप में हुई है। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
पुलिस आरक्षक की नौकरी का दिया था झांसा
मामला सेलूद निवासी गैंदलाल बंछोर की शिकायत से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, जिला बेमेतरा के अतरिया निवासी उमेश दास मानिकपुरी ने वर्ष 2023 में गैंदलाल के बेटे विकास बंछोर को पुलिस आरक्षक के पद पर भर्ती कराने की बात कही थी।
नौकरी लगने की उम्मीद में गैंदलाल ने आरोपी को अलग-अलग किस्तों में कुल 12 लाख रुपये दे दिए। रकम लेने के बाद भी युवक की भर्ती नहीं हुई।
आरोप है कि नौकरी नहीं लगने के बाद जब परिवार ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की, तो आरोपी लगातार उन्हें अलग-अलग बातों में उलझाता रहा। काफी समय बीतने के बाद भी पैसा वापस नहीं मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की शरण ली।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पीड़ित की शिकायत मिलने के बाद उतई थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपियों की तलाश शुरू की। संभावित ठिकानों पर दबिश देकर पुलिस ने उमेश दास मानिकपुरी और राजेश वर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सामान भी जब्त किए हैं।
- आरोपियों से संबंधित बैंक खाता जब्त किया गया।
- मोबाइल फोन भी पुलिस ने कब्जे में लिया।
- मामले से जुड़े तथ्यों और लेन-देन की जांच की जा रही है।
- दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
नौकरी के नाम पर पैसे देने से पहले रहें सावधान
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले लोगों से युवाओं और उनके परिजनों को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में अनधिकृत व्यक्ति को बड़ी रकम देना आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी परेशानी का कारण भी बन सकता है।
किसी व्यक्ति द्वारा सरकारी नौकरी लगवाने का दावा किए जाने पर उसके भरोसे बड़ी रकम देने के बजाय भर्ती की आधिकारिक प्रक्रिया और संबंधित विभाग की जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।
पुलिस ने की कार्रवाई
दुर्ग जिले के इस मामले में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। फिलहाल मामले में बैंक खातों, मोबाइल फोन और कथित लेन-देन से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सरकारी नौकरी का लालच देकर ठगी करने वाले लोगों से सावधान रहना कितना जरूरी है। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और उनके परिवारों को किसी भी व्यक्ति के दावे पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्तर पर पूरी जानकारी की जांच करनी चाहिए।







