रायपुर। छत्तीसगढ़ में दिव्यांग महिलाओं के लिए आयोजित सावन तीज महोत्सव अत्यंत भव्य, पावन और स्मरणीय रहा। यह महोत्सव केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि दिव्यांगता के प्रति समाज का नजरिया बदलने का एक महाअभियान सिद्ध हुआ।
आयोजन की मुख्य विशेषताए विशेष समर्पण: यह सावन तीज महोत्सव विशेष रूप से दृष्टिबाधित, कर्णबाधित, अस्थिबाधित एवं अन्य विशेष आवश्यकता वाली महिलाओं को समर्पित था।
सुगम्यता एवं प्रबंध: अस्थिबाधित बहनों की सुविधा का पूरा ध्यान रखते हुए आयोजन स्थल को पूरी तरह से बाधारहित और सुगम्य बनाया गया था।
दृष्टिबाधित महिलाओं के लिए विशेष रूप से स्पर्श और ध्वनि आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सुंदर प्रबंध किया गया था।
सुरक्षा, खान-पान और विश्राम के अत्यंत पुख्ता प्रबंध किए गए थे। सांस्कृतिक उल्लास: हरे-भरे परिधानों और पारंपरिक श्रृंगार में सजी दिव्यांग महिलाओं ने सावन के प्राकृतिक सौंदर्य को जीवंत कर दिया। मंच पर उन्होंने अपनी शारीरिक सीमाओं को लांघकर भावपूर्ण और ऊर्जावान प्रस्तुतियां दीं।
राष्ट्रगान एवं राज्य गीत: बिटिया अरुणिमा शर्मा द्वारा कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान और राज्य गीत की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
प्रमुख अतिथि एवं गरिमामयी उपस्थिति श्रीमती शुभांगी संजय आप्टे जी: इनके कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में इस भव्य तीज महोत्सव का सफल आयोजन किया गया। श्री संजय आप्टे जी: इस पावन और संवेदनशील आयोजन को साकार करने में इनका विशेष व सराहनीय सहयोग रहा। डॉ. मौसमी घानेकर जी: प्रख्यात समाजसेवी की समर्पित भूमिका और सहयोग ने इस आयोजन को और अधिक गरिमामय बनाया।
विशेष अतिथिगण: श्री उदयभान सिंग जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। पद्मश्री बुदरी ताती जी (बारसूर से) विशेष रूप से सम्मिलित हुईं। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ममता साहू जी भी उपस्थित रहीं और उन्होंने दिव्यांग बहनों का मनोबल बढ़ाया।
सहयोगी संस्थाएं एवं परिवार: महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय काले, महाराष्ट्र मंडल की बहनें, वनबंधु की बहनें, लाहोटी मित्र मंडल के सदस्य तथा बहुत बड़ी संख्या में मित्र परिवार उपस्थित रहा। मंच संचालन: अरुणा यादव जी ने अपने सुंदर मंच संचालन से सभी को बांधे रखा।
सम्मान एवं उपहार सभी गणमान्य अतिथियों एवं आयोजकों ने मिलकर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभ शुभारंभ किया।अतिथियों एवं आयोजकों ने अपने हाथों से सभी प्रतिभागी और विजेता दिव्यांग बहनों को तीज का सुहाग पिटारा, आकर्षक उपहार एवं प्रशस्ति पत्र भेंट किए।
आयोजन का संदेश एवं प्रभाव आत्मविश्वास का संचार: समाज में उपेक्षित महसूस करने वाली दिव्यांग बहनों के चेहरे पर इस आयोजन से अद्भुत मुस्कान बिखर गई। उनके आत्मविश्वास और नृत्य ने सभी उपस्थित अतिथियों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। आयोग की प्रतिबद्धता: महिला आयोग अध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि दिव्यांग बहनों के अधिकारों और स्वावलंबन के लिए आयोग सदैव तत्पर रहेगा। सकारात्मक संदेश: यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और संवेदनशीलता का एक जीवंत उदाहरण बन गया, जिसने यह संदेश दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक अक्षमता की मोहताज नहीं होती और ईश्वर के बनाए हर इंसान में अद्भुत क्षमताएं छिपी होती हैं।







