अमलेश्वर। दुर्ग। दुर्ग जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले आठ छात्रों की तबीयत कथित तौर पर संदिग्ध नशीली दवा खाने के बाद अचानक बिगड़ गई। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और परिजनों में हड़कंप मच गया। सभी प्रभावित छात्रों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां एक छात्र की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
दुर्ग के पंचशील नगर स्थित शासकीय चंद्रशेखर आजाद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की है। जानकारी के अनुसार, कक्षा 10वीं के एक छात्र ने अपने साथ पढ़ने वाले कुछ छात्रों को चॉकलेट बताकर एक संदिग्ध प्रतिबंधित दवा खिला दी। बच्चों ने बिना किसी संदेह के दवा खा ली।
कुछ ही देर बाद छात्रों को चक्कर आने, घबराहट, शरीर में अकड़न, कमजोरी और बेहोशी जैसी शिकायतें होने लगीं। स्कूल स्टाफ ने तुरंत स्थिति को गंभीर समझते हुए परिजनों को सूचना दी और बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया।
एक छात्र ICU में अस्पताल में भर्ती छात्रों में नैतिक रामटेके की हालत सबसे गंभीर बताई गई है। डॉक्टरों ने उसे बेहतर निगरानी के लिए आईसीयू में भर्ती किया है। वहीं अन्य छात्रों का इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ बच्चों की स्थिति में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।इस घटना से प्रभावित छात्रों में तनेश्वर यादव, हर्ष सिन्हा, भूपेंद्र साहू, विवेक कुम्भकार, नैतिक रामटेके, तुषार ढिमर, लकेश ढिमर और फनिश निषाद शामिल हैं।
स्कूल की प्राचार्य नलिनी वर्मा ने बताया कि शिक्षकों को इस घटना की पहले से कोई जानकारी नहीं थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एक छात्र अपने साथ प्रतिबंधित दवा लेकर आया था और उसने ही अन्य छात्रों को उसे खाने के लिए दिया। घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को सूचित कर दिया गया।प्राचार्य ने कहा कि पूरे मामले में प्रशासन के साथ सहयोग किया जा रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे
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घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने आरोपी छात्र के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि प्रतिबंधित दवा छात्र तक कैसे पहुंची, वह दवा किसने उपलब्ध कराई और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या अन्य व्यक्ति शामिल है।
पुलिस स्कूल के शिक्षकों, छात्रों और परिजनों से पूछताछ कर रही है। साथ ही दवा के नमूने को जांच के लिए भेजने की भी प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चों ने किस प्रकार के पदार्थ का सेवन किया था।
घटना पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि स्कूलों तक नशीले पदार्थ पहुंच रहे हैं तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने राज्य सरकार और गृह विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना ने एक बार फिर स्कूल परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों तक नशीले पदार्थों की पहुंच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में नियमित जागरूकता अभियान, छात्रों की काउंसलिंग, बैग की रैंडम जांच और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।





