बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में नए पंजीकृत अधिवक्ताओं को शुरुआती जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है। हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रस्तावित योजना की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए, ताकि नए अधिवक्ताओं को इसका लाभ समय पर मिल सके।
मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल शामिल थे। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अदालत में शपथपत्र प्रस्तुत कर योजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी गई।
नए अधिवक्ताओं के लिए 20 हजार रुपये अनुदान का प्रस्ताव
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल में नए पंजीकृत अधिवक्ताओं को एकमुश्त 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इस राशि का उपयोग नए अधिवक्ता अपनी शुरुआती व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कर सकेंगे।
प्रस्तावित अनुदान का उद्देश्य:
- कानून की जरूरी किताबें खरीदने में सहायता।
- छोटी लाइब्रेरी तैयार करने में मदद।
- टेबल और कुर्सी जैसी आवश्यक सामग्री खरीदने में सहयोग।
- वकालत के शुरुआती दौर में आर्थिक सहारा देना।
नए अधिवक्ताओं को करियर की शुरुआत में कई तरह की आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह योजना उनके लिए मददगार साबित हो सकती है।
वित्त विभाग ने कैबिनेट में रखने की दी सलाह
राज्य शासन ने अदालत को बताया कि 2 मार्च 2026 को हुई बैठक के एजेंडा आइटम क्रमांक-6 के तहत इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई थी। इसके बाद प्रस्ताव को वित्त विभाग के पास भेजा गया।
वित्त विभाग ने इस मामले को राज्य मंत्रिपरिषद यानी कैबिनेट के समक्ष रखने की सलाह दी है। हालांकि, इससे पहले अन्य राज्यों में लागू ऐसी योजनाओं की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया चल रही है।
अन्य राज्यों की योजनाओं का लिया जा रहा अध्ययन
सरकार ने बताया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में नए अधिवक्ताओं के लिए लागू सहायता योजनाओं और नियमों की जानकारी मांगी गई है।
इन राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के बाद छत्तीसगढ़ में योजना को अंतिम रूप देने पर विचार किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने जताई तेजी की उम्मीद
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की प्रक्रिया पर ध्यान देते हुए उम्मीद जताई कि जरूरी जानकारियां जल्द जुटाई जाएंगी और प्रस्ताव को बिना किसी अनावश्यक देरी के कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।
अदालत ने कहा कि इस विषय पर जल्द उचित निर्णय लिया जाना जरूरी है, ताकि योजना का लाभ जरूरतमंद नए अधिवक्ताओं तक पहुंच सके।
अगली सुनवाई 29 सितंबर को
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। साथ ही प्रकरण को संबंधित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। यदि कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो छत्तीसगढ़ में नए अधिवक्ताओं को शुरुआती दौर में आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। यह कदम प्रदेश में न्यायिक क्षेत्र से जुड़ने वाले युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





