सांकरा। दुर्ग/रायपुर। छत्तीसगढ़ में वानिकी एवं उद्यानिकी अनुसंधान को सुदृढ़ एवं परिणामुुखी बनाने की दिशा में महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग और राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर के संगोष्ठी कक्ष में संपन्न हुआ। यह समझौता प्रदेश में उच्च स्तरीय शोध, तकनीकी सहयोग, नवाचार एवं सामुदायिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।
यह एमओयू विशेष रूप से वानिकी एवं उद्यानिकी विषयों में अध्ययनरत स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों के शैक्षणिक एवं शोध कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है। इस अवसर पर निदेशक, राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर श्री तपेश झा ने कहा कि दोनों संस्थानों के मध्य समझौता वानिकी के क्षेत्र में उच्च स्तरीय शोध, तकनीकी एवं ज्ञान आदान-प्रदान से वानिकी एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में अनुसंधान को नया आयाम मिलेगा।
एमओयू के प्रमुख बिंदु
वानिकी एवं उद्यानिकी अनुसंधान को प्रोत्साहित करने हेतु संयुक्त सेमिनार, सम्मेलन, कार्यशालाओं एवं संगोष्ठियों का आयोजन।
दोनों संस्थानों की प्रयोगशालाओं, उपकरणों, शोध अधोसंरचना एवं तकनीकी संसाधनों का परस्पर उपयोग।
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय वित्तपोषित शोध परियोजनाओं का संयुक्त संचालन।
शोध पत्रिकाओं, मोनोग्राफ, प्रशिक्षण सामग्री एवं वैज्ञानिक प्रकाशनों का संयुक्त प्रकाशन।
स्वदेशी तकनीकी ज्ञान का संवर्धन-विशेषकर वानिकी, गैर-काष्ठ वन उत्पाद औषधीय एवं सुगंधित पौधों, ग्रामीण प्रौद्योगिकी तथा जनजातीय परंपरागत ज्ञान के क्षेत्र में।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण युवाओं हेतु उद्यमिता विकास एवं आय-सृजन आधारित कार्यक्रमों का संचालन।
दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक तकनीकी ज्ञान का प्रसार कर उन्हें मुख्यधारा के विकास से जोड़ना।
पाठ्यक्रम विकास, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों एवं ई-लर्निंग संसाधनों का आदान-प्रदान।
बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण, गोपनीयता प्रावधान एवं वार्षिक संयुक्त समीक्षा की व्यवस्था।
कुलपति महोदय ने जताया हर्ष
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय प्रो. रवि आर. सक्सेना ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ जैव-विविधता, वन संपदा एवं प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है, जहाँ अनुसंधान की असीम संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि यह एमओयू न केवल शोध गतिविधियों को गति प्रदान करेगा, बल्कि प्रदेश में नवाचार आधारित विकास की मजबूत नींव भी रखेगा। कुलपति महोदय ने आगे कहा कि इस सहयोग से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को उच्चस्तरीय प्रयोगशाला सुविधाएँ, विशेषज्ञ मार्गदर्शन एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त होगा। वन आधारित आजीविका, मूल्य संवर्धन, ग्रामीण उद्यमिता तथा प्रदेश के जनजातीय एवं ग्रामीण समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान को बढ़ावा मिलेगा।
एमओयू कार्यक्रम के अवसर पर निदेशक, रायपुर तपेश झा, संयुक्त संचालक निर्मला खेस, रिसर्च एसोसिएट डॉ. मनोज कश्यप तथा विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. अमित दीक्षित, अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं डॉ. राजेश्वरी साहू, विशेष कार्यस्थ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर दोनों संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारीगण, वैज्ञानिक एवं प्राध्यापकगण भी उपस्थित रहे।
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