रायपुर. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा जानवरों को “जीवन धन” कहे जाने और ‘पशु’ शब्द के स्थान पर अधिक संवेदनशील और मानवीय भाषा के उपयोग की जो भावपूर्ण अपील की गई, उसे उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने भारतीय संस्कृति की आत्मा से जुड़ा हुआ एक अंतरात्मा को स्पर्श करने वाला पहल बताया और हृदय से उसका अभिनंदन किया।
विधायक मिश्रा ने कहा- “हमारे पूर्वजों ने पेड़ों, नदियों, पर्वतों और जीवों को केवल संसाधन नहीं. अपितु सजीव आस्था और श्रद्धा के रूप में पूजा है। यही भारत की सनातन आत्मा है करुणा, सम्भाव और सह अस्तित्व का गीत।”
विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि “गौ माता हमारे देश की आध्यात्मिक चेतना, मातृत्व भाव और सांस्कृतिक करुणा का जीवंत प्रतीक हैं। वे केवल एक जानवर नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की जीवंत देवी हैं जो निरूरवार्थ पोषण करती हैं. प्रकृति को संवारती हैं और जीवन को संस्कारों से समृद्ध करती है।”
‘गाय का दूध केवल आहार नहीं, आशीर्वाद है। गोबर और गौमूत्र केवल जैविक संसाधन नहीं, बल्कि धरती की उर्वरता और स्वास्थ्य का आधार हैं। गाँव की सुबह उनकी रंगाहट से सजती है और खेतों की हरियाली उनकी उपस्थिति से मुस्कराती है।”
“गौ-संरक्षण केवल धार्मिक उत्तरदायित्व नहीं, बल्कि यह हमारी कृषि परंपरा, ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा है।”
मिश्रा जी ने कहा- “भारत वह देश है, जहाँ हाथी को गणेश, नाग को देवता, कर सम्मानित किया जाता है। यह केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि संवेदना की पराकाष्ठा है, जहाँ हर जीव को दया, प्रेम और आदर का अधिकार है।”
यह विचारधारा केवल भाषण नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच के आत्मीय संवाद की पुकार है। इससे न केवल पशुधन का संरक्षण होगा, बल्कि कृषकों को संबल, गाँवों को संजीवनी और धरती को हरियाली का वरदान मिलेगा।
‘जीवों से प्रेम, प्रकृति से संवाद और संस्कृति से सरोकार यही भारत है, यही छत्तीसगढ़ की आत्मा है।”
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