नई दिल्ली :-स्कंदपुराण के अनुसार कलियुग के आखिर में, जब पाप अपने चरम पर होगा, तब भगवान विष्णु कल्कि के रूप में अवतार लेंगे। यह समय कलयुग और सतयुग के बीच का संधिकाल होगा। कहा जाता है कि भगवान कल्कि 64 कलाओं में माहिर होंगे। कल्कि पुराण के अनुसार उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले के सम्भल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि पुत्र रूप में जन्म लेंगे।
कल्कि भगवान, जो विष्णु जी के अवतार हैं, अपने गुरु परशुराम जी से मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे। परशुराम जी भी विष्णु जी के अवतार माने जाते हैं और उन्हें अमरता मिली हुई है। कल्कि भगवान, परशुराम जी के कहने पर भगवान शिव की तपस्या करेंगे। इस तपस्या से उन्हें दिव्य शक्तियां मिलेंगी जिनसे वे दुनिया से अधर्म का नाश करेंगे।
स्कंद पुराण के दशम अध्याय में स्पष्ट वर्णित है कि कलियुग में भगवान श्रीविष्णु का अवतार श्रीकल्कि के रुप में सम्भल ग्राम में होगा। अग्नि पुराण के 16वेंअध्याय में कल्कि अवतार का चित्रण भी किया गया। इस चित्रण के अनुसार भगवान राम की तरह ही कल्कि अवतार ने हाथ में तीर-कमान धारण किया होगा और वे एक घोड़े पर सवार होकर आएंगे। कल्कि पुराण में उल्लेख मिलता है कि भगवान कल्कि हाथ में चमचमाती हुई तलवार लिए सफेद घोड़े पर सवार होकर पापियों का अंत करेंगे।
भगवान विष्णु के दसवें अवतार, कल्कि, के बारे में कहा जाता है कि उनके भी चार भाई होंगे। ये भाई उनके साथ मिलकर धर्म की स्थापना में मदद करेंगे। उनके नाम होंगे सुमन्त, प्राज्ञ और कवि। अपने इन्हीं भाइयों के साथ मिलकर भगवान धर्म की स्थापना करेंगे। कल्कि भगवान, जो विष्णु जी के दसवें अवतार माने जाते हैं, उनकी पत्नी के बारे में उल्लेख किया गया कि वो देवी लक्ष्मी का ही एक रूप होंगी जिनका नाम ‘पद्मा’ होगा। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार माता वैष्णो देवी, जो भगवान राम से विवाह के लिए कई युगों से तपस्या कर रही हैं, उनकी तपस्या कल्कि भगवान ही पूर्ण करेंगे और उनसे विवाह करेंगे। स्कंदपुराण और कल्कि पुराण में भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि माता वैष्णो देवी रामावतार के समय से ही तपस्या कर रही हैं।
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