रायपुर, छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए 12,992 करोड़ 70 लाख 98 हजार 800 रूपए का द्वितीय अनुपूरक बजट ध्वनि मत से पारित किया गया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि हमारे घोषणा पत्र में जनता से किए गए वायदों को पूरा करने की शुरूआत, हम इस अनुपूरक बजट के माध्यम से करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष की उम्र में मेरे सिर से पिता का साया उठ गया था, लेकिन मैं प्रदेश के युवाओं को यह आश्वस्त करना चाहता हूं कि मैं एक पिता और एक पालक के रूप में आपकी बेहतरी के लिए सदैव काम करता रहूंगा। प्रदेश की बहनों की सुरक्षा-समृद्धि के लिए एक भाई की तरह तत्पर रहूंगा। अपने पुत्र धर्म का निर्वाह करते हुए प्रदेश के सभी बुजुर्गों के स्वास्थ्य एवं सुविधाओं के लिए सदैव प्रयासरत रहूंगा। मैं छत्तीसगढ़ के हर नागरिक की बेहतरी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने में कभी पीछे नहीं हटूंगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनता से प्राप्त अभूतपूर्व समर्थन के लिए आम जनता का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने मोदी की गारंटी पर भरोसा जताया है और मुझे छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा का अवसर दिया है। मुख्यमंत्री की शपथ लिए मुझे कुछ घंटे हुए थे लेकिन मोदी जी की गारंटी का क्रियान्वयन की शुरूआत करने के लिए हमने एक पल की भी देरी नहीं की। क्योंकि मोदी जी की गारंटी का मतलब होता है गारंटी पूरा होने की गारंटी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछली सरकार ने 1 लाख 21 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक का बजट पेश किया था, योजनाओं को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की गई, लेकिन सरकार ने राजस्व प्राप्तियों के ठोस प्रयास नहीं किए। परिणाम यह रहा कि पांच वर्षों में पिछली सरकार ने खर्चों की पूर्ति के लिए बेतहाशा कर्ज लिया। 15 वर्ष के शासन काल के बाद जब हमने खजाना सौंपा, तो वर्ष 2018 में राज्य पर 41 हजार 695 करोड़ का कुल कर्ज था। मात्र पांच साल की अवधि में कर्ज की यह राशि बढ़कर 91,533 करोड़ रूपए हो गई। इस तरह पांच साल में 50 हजार करोड़ रूपए का कर्ज लेने का काम पिछली सरकार किया। ऐसी विषम वित्तीय स्थिति में खजाना मिलने के बावजूद हमारी सरकार मोदी की गारंटी के प्रत्येक वचन को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि मैं गरीब परिवार से आता हूं। गरीब के दर्द को समझता हूं। एक गरीब का सबसे बड़ा सपना होता है अपना स्वयं का मकान। खुले आसमान के नीचे अथवा कच्चे मकान में जब चूल्हे जलते हैं, तो हवा और बारिश की बूंदों से कई बार चूल्हे की आग बुझ जाती है और गरीब भूखे पेट सोने के लिए विवश हो जाते हैं। जन-जन के नायक मोदी जी का संकल्प है कि किसी गरीब परिवार का चूल्हा अब नहीं बुझेगा, सबको अपना पक्का मकान मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के संबंध में कहा कि आपने अपने 2018 के अपने जन घोषणा पत्र में ग्रामीण और शहरी आवास देने का वायदा किया था, लेकिन आपने लोगों को आवास देने के बदले, केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना में मिलने वाले आवासों का लाभ भी छीन लिया। अधिकांश राज्यों ने स्थाई प्रतीक्षा सूची के अतिरिक्त आवास प्लस सूची में सम्मिलित परिवारों को भी आवास स्वीकृत किया, लेकिन आपने कोई कार्यवाही नहीं की। आपकी सरकार की उदासीनता से स्थाई प्रतीक्षा सूची के 7 लाख 82 हजार ग्रामीण आवासों की स्वीकृति में प्रगति लाने के लिए केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री को पत्र लिखने के लिए विवश होना पड़ा। आपकी सरकार के मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। जिन्हें आवास नहीं मिले वे आवास से वंचित हैं। जिनको मिला ओ आधा-अधूरा है। एक किश्त से मकान बनाना शुरू कर चुके ग्रामीण कर्ज लेकर मकान पूरा कर रहे हैं।
About The Author






