रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक परिवार ने पिछले करीब छह वर्षों से लगातार साइबर उत्पीड़न, सोशल मीडिया पर अश्लील टिप्पणियां और दुष्कर्म की धमकियां मिलने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि बार-बार पुलिस अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। परिवार ने पुलिस महानिदेशक और रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर मामले में एफआईआर दर्ज करने, निष्पक्ष जांच और सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
रायपुर निवासी ने अपनी शिकायत में बताया है कि एक व्यक्ति ऋषि सक्सेना जो फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर उनकी बहन और परिवार के अन्य सदस्यों को लगातार परेशान कर रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह सिलसिला कई वर्षों से चल रहा है। परिवार का आरोप है कि सोशल मीडिया पर अश्लील और अपमानजनक टिप्पणियां करने के साथ ही गंभीर आपराधिक धमकियां भी दी जा रही हैं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित व्यक्ति का पक्ष भी उपलब्ध नहीं है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनकी बहन को निशाना बनाने के लिए बार-बार अलग-अलग इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए जा रहे हैं। इन अकाउंट के माध्यम से उनकी तस्वीरों पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं। परिवार का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति सोशल मीडिया पर युवती के परिचितों, दोस्तों और रिश्तेदारों को टैग करके भी अपमानजनक सामग्री साझा करता है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को दिए आवेदन में एक हालिया इंस्टाग्राम अकाउंट का विवरण भी उपलब्ध कराया है। परिवार का दावा है कि इस अकाउंट का उपयोग भी उत्पीड़न के लिए किया गया है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है और सभी सदस्य लगातार मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप युवती को दुष्कर्म की धमकी दिए जाने का है। परिवार का कहना है कि कथित ऑनलाइन उत्पीड़न अब केवल आपत्तिजनक टिप्पणियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें गंभीर धमकियां भी शामिल हो गई हैं। पीड़ित पक्ष के अनुसार, लगातार धमकियों के कारण युवती और उसके परिजन भय के माहौल में रह रहे हैं। परिवार को आशंका है कि ऑनलाइन धमकियों के बाद उनकी सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है। इसी वजह से शिकायतकर्ता ने पुलिस से मामले को गंभीरता से लेने और संबंधित डिजिटल गतिविधियों की जांच करने की मांग की है। परिवार ने शिकायत के समर्थन में सोशल मीडिया से संबंधित स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराने की बात भी कही है। हालांकि, इन डिजिटल साक्ष्यों की प्रामाणिकता और उनसे किसी व्यक्ति के जुड़ाव की पुष्टि जांच से ही हो सकेगी।
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने इस मामले में रायपुर पुलिस आयुक्त संजीव शुक्ला सहित विभिन्न पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है। उनके अनुसार, साइबर क्राइम थाना, मुजगहन थाना और राजेंद्र नगर थाने में भी आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि वर्ष 2019 में भी राजेंद्र नगर थाने में संबंधित व्यक्ति को बुलाकर समझाइश दी गई थी। इसके बावजूद कथित उत्पीड़न बंद नहीं हुआ। परिवार का आरोप है कि लगातार शिकायतों और डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराने के बाद भी उनके आवेदन पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, पुलिस रिकॉर्ड और अधिकारियों की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं होने के कारण शिकायतों पर हुई कार्रवाई की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि संबंधित व्यक्ति की कथित ऑनलाइन गतिविधियों से केवल उनका परिवार ही प्रभावित नहीं है। उनके अनुसार, कुछ अन्य लोगों और युवतियों को भी इसी प्रकार के ऑनलाइन उत्पीड़न तथा धमकियों का सामना करना पड़ा है। परिवार का दावा है कि अन्य पीड़ितों ने भी संबंधित पुलिस थानों में शिकायतें दी हैं। हालांकि, इन शिकायतों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति और उनमें लगाए गए आरोपों के संबंध में स्वतंत्र जानकारी उपलब्ध नहीं है। पीड़ित परिवार चाहता है कि पुलिस सभी संबंधित शिकायतों और डिजिटल सामग्री की जांच कर यह पता लगाए कि कथित सोशल मीडिया अकाउंट कौन संचालित कर रहा है।
पीड़ित और उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि इतने लंबे समय से शिकायत करने के बाद भी उन्हें उचित कार्रवाई का भरोसा नहीं मिल पाया है। परिवार का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा और साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। उनका सवाल है कि जब शिकायत में गंभीर धमकियों और ऑनलाइन उत्पीड़न का उल्लेख किया गया है, तो मामले की जांच और आवश्यक सुरक्षा उपायों में देरी क्यों हो रही है। परिवार ने मांग की है कि शिकायत में उपलब्ध कराई गई डिजिटल सामग्री की जांच कर संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन और कथित धमकियों की वास्तविकता का पता लगाया जाए।
पीड़ित परिवार ने कहा है कि यदि उनकी शिकायत पर जल्द उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्यायालय और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे। परिजनों ने लगातार मानसिक प्रताड़ना का हवाला देते हुए अत्यधिक निराशा व्यक्त की है। शिकायत में परिवार के सदस्यों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने जैसी चिंताजनक बात भी कही गई है, जिसे गंभीरता से लेते हुए उनकी सुरक्षा और मानसिक स्थिति पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। परिवार का कहना है कि उनकी प्राथमिक मांग शिकायत की निष्पक्ष जांच, कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता ने ऑनलाइन उत्पीड़न, अश्लील टिप्पणियों, धमकियों और पुलिस कार्रवाई नहीं होने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की सत्यता स्थापित करने के लिए संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल साक्ष्य, पूर्व शिकायतों और पुलिस रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है। साथ ही शिकायत में नामित व्यक्ति का पक्ष और पुलिस प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल पीड़ित परिवार ने वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय और सुरक्षा की मांग की है। मामले में पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा जांच की स्थिति सामने आने के बाद ही आरोपों और अब तक हुई कार्रवाई की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।





