अमलेश्वर। दुर्ग-भिलाई। शिक्षक भर्ती में अवसर देने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दुर्ग में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। करीब पांच छात्रों को एसडीएम कोर्ट से नोटिस जारी कर 18 अगस्त को पेश होने के लिए कहा गया है। छात्रों से छह महीने तक शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 50-50 हजार रुपए की प्रतिभूति वाले बंधपत्र को लेकर जवाब मांगा गया है। मामला 13 अगस्त को हिंदी भवन के सामने किए गए प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस की रिपोर्ट में बिना अनुमति मुख्य सड़क पर धरना-प्रदर्शन करने और इससे यातायात प्रभावित होने की बात कही गई है। इसके आधार पर पुलिस ने मामला एसडीएम कोर्ट भेजा, जिसके बाद एसडीएम ने प्रारंभिक आदेश जारी किया।
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र 13 अगस्त को दुर्ग पहुंचे थे। हिंदी भवन के सामने मुख्य सड़क पर छात्रों ने शिक्षक भर्ती और CTET से जुड़ी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। छात्रों की प्रमुख मांग आगामी शिक्षक भर्ती में विज्ञान शिक्षक, जीव विज्ञान व्याख्याता, रसायन व्याख्याता और गणित व्याख्याता के पद शामिल करने की है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने इन्हीं विषयों में पढ़ाई की है और लंबे समय से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। अगर इन विषयों के पद भर्ती में शामिल नहीं किए गए तो बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर नहीं मिलेगा।
छात्रों ने 6 सितंबर 2026 को प्रस्तावित CTET परीक्षा को लेकर भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि इस परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को भी आगामी शिक्षक भर्ती में आवेदन का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा स्नातक में 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता में सभी वर्गों को पांच प्रतिशत की छूट देने और स्वामी आत्मानंद स्कूलों की भर्ती में हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम के पात्र अभ्यर्थियों को मौका देने की मांग भी छात्रों ने रखी थी।
एसडीएम के 14 अगस्त के आदेश के मुताबिक पुलिस ने BNSS की धारा 126 से 135(3) के तहत प्रकरण एसडीएम कोर्ट भेजा। पुलिस रिपोर्ट में कहा गया कि 13 अगस्त को हिंदी भवन के सामने मुख्य मार्ग पर बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन किया गया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने BNSS की धारा 130 के तहत प्रारंभिक आदेश जारी किया। प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले करीब पांच छात्रों से छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 50 हजार रुपए की प्रतिभूति वाले बंधपत्र के संबंध में जवाब मांगा गया है।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शन को लेकर कलेक्टर को पहले ही सूचना दी थी। उनका तर्क है कि प्रदर्शन की जानकारी प्रशासन को देने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। छात्रों ने आरोप लगाया कि रोजगार और शिक्षक भर्ती में अवसर की मांग करने पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि पहले से रोजगार का संकट है और अब प्रदर्शन के बाद बाउंड ओवर की कार्रवाई से उन पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि सरकार से भर्ती में अवसर मांगना उनका अधिकार है। वे लंबे समय से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के बाद उनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की तैयारी से छात्र नाराज हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें कार्रवाई के बजाय सरकार के साथ बातचीत का अवसर मिलना चाहिए, ताकि भर्ती से जुड़ी उनकी मांगों पर स्पष्ट स्थिति सामने आ सके। दुर्ग स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का गृह जिला है। छात्रों ने इसी जिले में प्रदर्शन कर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने शिक्षा मंत्री से भी अपनी मांगों को लेकर सवाल किया था। छात्रों के मुताबिक, उन्हें मांगों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला। अब एसडीएम कोर्ट से नोटिस मिलने के बाद छात्रों का कहना है कि वे 18 अगस्त को अपना पक्ष रखेंगे।
बाउंड ओवर शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जाने वाली प्रतिबंधात्मक कार्रवाई है। यदि पुलिस को किसी व्यक्ति से शांति भंग होने या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका होती है, तो मामला एसडीएम कोर्ट भेजा जा सकता है। एसडीएम BNSS की धारा 130 के तहत प्रारंभिक आदेश जारी कर संबंधित व्यक्ति से जवाब मांग सकते हैं। सुनवाई के बाद बंधपत्र की शर्त तय की जा सकती है। यह अपने आप में सजा या FIR नहीं होती। बंधपत्र की राशि सीधे जुर्माना भी नहीं होती, बल्कि तय अवधि तक शांति बनाए रखने की कानूनी जिम्मेदारी से जुड़ी होती है। दुर्ग के इस मामले में छात्रों से छह महीने के लिए 50 हजार रुपए की प्रतिभूति वाले बंधपत्र को लेकर जवाब मांगा गया है। उन्हें 18 अगस्त को एसडीएम कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा।
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