अमलेश्वर। रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रतिभाशाली बेटी गुंजा धीवर ने उत्तराखंड की राजधानी Dehradun में दिनांक 9 एवं 10 मई 2026 को आयोजित ऑल इंडिया कराटे प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण एवं रजत पदक अर्जित कर न केवल अपने परिवार और क्षेत्र, बल्कि सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर दिया है।
गुंजा धीवर की यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, अनुशासन, आत्मविश्वास और अथक परिश्रम की प्रेरणादायी मिसाल बनकर उभरी है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच निरंतर अभ्यास, अदम्य साहस तथा दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो कोई भी बाधा सफलता के मार्ग को रोक नहीं सकती।
प्रतियोगिता के दौरान गुंजा धीवर ने काता स्पर्धा में शानदार तकनीकी प्रदर्शन करते हुए रजत पदक प्राप्त किया, वहीं कुमिते स्पर्धा में अपने तेज़ कौशल, आत्मविश्वास और संघर्षशीलता का परिचय देते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने उपस्थित खेल प्रेमियों, प्रशिक्षकों तथा विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ियों को प्रभावित किया और छत्तीसगढ़ की प्रतिभा का लोहा मनवाया।
गौरतलब है कि गुंजा धीवर का चयन इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए अत्यंत कठिन प्रतिस्पर्धा और कठोर चयन प्रक्रिया के पश्चात हुआ था। इससे पूर्व भी वह Ratanpur एवं Delhi में आयोजित विभिन्न खेल कराटे प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अनेक सम्मान अर्जित कर चुकी हैं। अपने निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन से उन्होंने कई बार अपने जिले और राज्य का गौरव बढ़ाया है।
गुंजा धीवर केवल एक सफल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरक शक्ति भी हैं। वे क्षेत्र के बच्चों, विशेष रूप से बालिकाओं को कराटे प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मरक्षा, अनुशासन और आत्मनिर्भरता की शिक्षा दे रही हैं। उनके प्रयासों से अनेक बालिकाओं में आत्मविश्वास का संचार हुआ है तथा वे खेल एवं आत्मरक्षा के प्रति जागरूक हुई हैं।
उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि आज की नारी केवल घर की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल, शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक नेतृत्व जैसे प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही है। गुंजा धीवर ने अपने समर्पण और परिश्रम से यह सिद्ध कर दिया है कि महिलाओं की शक्ति और क्षमता असीमित है।
क्षेत्रवासियों, खेल प्रेमियों एवं सामाजिक संगठनों ने गुंजा धीवर की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी हैं। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और छत्तीसगढ़ की बेटियों को अपने सपनों को साकार करने का नया साहस प्रदान करेगी।
निस्संदेह, गुंजा धीवर की यह विजय केवल पदकों की चमक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष, समर्पण और आत्मबल की कहानी है जिसने सम्पूर्ण समाज को गौरवान्वित कर दिया है। उनकी उपलब्धि की यह गूंज आने वाले समय में अनेक नई प्रतिभाओं को जन्म देने का माध्यम बनेगी।





