कोंडागांव। सीएम साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत कोंडागांव प्रवास के दौरान ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा स्थित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का निरीक्षण कर ग्रामीणों से आत्मीय चर्चा की तथा केंद्र के माध्यम से मिल रही सुविधाओं का फीडबैक लिया। “सेवा सेतु” जैसे उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आय-जाति प्रमाण पत्र, पेंशन, फंड ट्रांसफर, बिजली बिल भुगतान सहित 442 शासकीय सेवाएं अब ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो रही हैं। यह डिजिटल सुशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हमारी सरकार का सतत प्रयास है कि तकनीक के माध्यम से शासन अधिक पारदर्शी, सुगम और जनकेंद्रित बने तथा अंतिम व्यक्ति तक सुविधाओं की सहज पहुंच सुनिश्चित हो।
नन्ही मुस्कानों में छत्तीसगढ़ का उज्ज्वल भविष्य झलकता है :-
सुशासन तिहार के दौरान कोंडागांव जिले की ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और बच्चों के बीच आत्मीय समय बिताया। उनकी सहज मुस्कान, उत्साह और मासूम ऊर्जा ने मन को आनंद एवं विश्वास से भर दिया। इस अवसर पर नवजात शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार भी संपन्न कराया। हमारी समृद्ध परंपरा में यह संस्कार बच्चे के स्वस्थ, सुपोषित और उज्ज्वल जीवन की मंगलकामना का प्रतीक है। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा की मजबूत नींव हैं। यह देखकर संतोष होता है कि सुपोषण और बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव दूरस्थ अंचलों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।
सुशासन तिहार के दौरान कोंडागांव जिले की ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत बने चमन लाल पवार जी के नए पक्के घर में गृह प्रवेश कराने का अवसर मिला। अपने आशियाने की चौखट पर खड़े परिवार के चेहरे पर झलकती खुशी, आत्मविश्वास और संतोष देख मन अत्यंत प्रसन्न हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना केवल पक्की छत उपलब्ध कराने की योजना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर जीवन का विश्वास देने का माध्यम बन रही है। सौर ऊर्जा सुविधा से युक्त यह घर आत्मनिर्भर और आधुनिक ग्रामीण जीवन की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी है। विकास का वास्तविक अर्थ तब साकार होता है, जब किसी जरूरतमंद परिवार को अपने सपनों की पक्की छत, सुरक्षा का भरोसा और बेहतर भविष्य का विश्वास मिलता है।
ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में आज लगभग 150 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन कर हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिला। पंजी, पुराण, पंचांग सहित उड़िया भाषा में लिखित ये अमूल्य पांडुलिपियां हमारे पूर्वजों की ज्ञान-संपदा, सांस्कृतिक चेतना और जीवन-दर्शन की जीवंत धरोहर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की पहल से संचालित ‘ज्ञानभारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ के माध्यम से इन दुर्लभ धरोहरों का संरक्षण एवं डिजिटलीकरण किया जा रहा है। हमारी गौरवशाली विरासत को सुरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुँचाने का यह एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी प्रयास है।
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