बेमेतरा । अमलेश्वर। प्रांतीय छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति जिला इकाई बेमेतरा द्वारा गत दिनों भद्रकाली मंदिर के पीछे तालाब के पास कवि गोष्ठी का अयोजन किया गया उक्त आयोजन की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति और हास्य-व्यंग्य कवि रामानन्द त्रिपाठी ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में गुरू घासीदास सम्मान से सम्मानित समाज सेवी व कवि भुवन दास जांगड़े, विशिष्ट अतिथि समाज सेवी लेखमणी पाण्डेय, दुर्गाशंकर चतुर्वेदी और कवियित्री सुश्री उमा जाटव रहीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए त्रिपाठी ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है।छत्तीसगढ़ी बोली भाखा से हमारा जुड़ाव सदियों से रहा है, वे हमारी माता है और हम उनके पुत्र हैं, हमारा फर्ज है अपनी माता के लिए कुछ न कुछ जरूर अच्छा कार्य करें।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि दुर्गाशंकर चतुर्वेदी ने कहा कि जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि मैं हमेशा कवियों के बीच रह कर अपने आप को सम्मानित महसूस करता हूं ।
उक्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भुवन दास जांगड़े ने कहा कि मुझे जो सम्मान उक्त समिति द्वारा दिया गया इसके लिए मैं बहुत आभारी हूं, अपने जगह पर सम्मान मिलना अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता हूं।
समिति के जिला अध्यक्ष गोकुल बंजारे ” चंदन “ने कविगोष्ठी का संचालन करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि बहुत ही कम समय में उक्त आयोजन को किया गया और सभी कवियों ने भारी उत्साह से छत्तीसगढ़ी में रचनाएं पेश किये।निश्चित है छत्तीसगढ़ी बोली भाखा का प्रभाव जन – जन तक जरूर पड़ेगा।
अन्य अतिथियों ने भी अपनी बातें रखीं।
अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर सर्वप्रथम समिति द्वारा कवि भुवन दास जांगड़े का सम्मान किया गया। गौरतलब हो कि समाज सेवी वरिष्ठ कवि भुवन दास जाँगड़े को विगत राज्योत्सव नवा रायपुर कार्यक्रम में गुरु घासीदास चेतना अवार्ड से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया गया था,
तत्पश्चात कवि गोष्ठी प्रारंभ हुई जो देर रात तक चलता रहा कवियों के अलावा भारी संख्या में श्रोता गण कविताओं का आनन्द उठाये।
निम्न कवियों ने अपनी रचनाएं पेश किये रामानन्द त्रिपाठी, गोकुल बंजारे चन्दन,मनोज पाटिल, भुवन दास जांगड़े, आत्माराम पटेल, संतोष साहु, सुश्री उमा जाटव, कांति बंजारे, मनोज मिर्झा, रेणुका कारूणिक, तरूण यादव व जँतराम निर्मलकर ।
उक्त कार्यक्रम में भारतीय थल सेना से सेवानिवृत्त एल. आर. साहू, ललित निर्मलकर प्रधान पाठक, टीकाराम देवांगन सेवानिवृत्त प्राचार्य, रामस्नेही वर्मा व्याख्याता, महेश्वर श्रीवास शिक्षक, लक्ष्मेन्द्र बैनर्जी, नेमूराम बंजारे, मिथलेश घृतलहरे, सनत यादव, ओंमकार मस्तके, हृदयनारायण यादव, द्रोपती बँजारे, अविनाश, अनिरुद्ध, दक्षकुमार, नीति बँजारे, ईश्वरी मिर्झा, गोरेलाल पाठक, मुन्नीबाई पाठक, रीया पाठक, सहित अनेकों लोग उपस्थित रहे।





