रायपुर। कीर्तिमान लेखिका कवयित्री शिक्षाविद तथा संस्कृति रक्षक डॉ. सुनीता पेंद्रो इनका भारत सरकार के वर्ष 2026 के सर्वोच्च श्रेणी के राष्ट्रीय पुरस्कार पद्मश्री हेतु नामांकन हुआ है और उनका नामांकन आयडी 426148 है। पद्मश्री पुरस्कार भारत सरकार के गृह विभाग के माध्यम से राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में वितरीत किए जाते है।
डॉ. सुनीता पेंद्रो इन्होने भारत की विभिन्न सामाजिक व्यवस्थाओं और संस्कृतियों का गहन अध्ययन किया है ।डॉ. सुनीता पंद्रो सही अर्थों में राष्ट्र निर्माण के ऐतिहासिक दायित्व का निर्वहन कर रही हैं, नई पीढ़ी को लक्ष्योन्मुख बना रही हैं और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं नैतिक मूल्यों का संचार कर रही हैं ।
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में जातिवाद भारतीय गणतंत्र का संविधान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की धरोहर एवं उसकी वर्तमान उपादेयता, आदि महत्वपूर्ण विषयों पर डॉ. सुनीता पंद्रो ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आदिवासी साहित्य और कला को बढ़ावा देने का असाधारण कार्य किया है।
डॉ. सुनीता पंद्रो ने अपने जीवन में जो विद्वत्तापूर्ण समर्पण दिखाया है, वह असाधारण है । डॉ. सुनीता पंद्रो विभिन्न पहलों के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती हैं कि भारत में महिलाओं को रोज़गार मिले और वे एक समृद्ध भारत के अपने सपने को साकार कर सकें । डॉ. सुनीता पंद्रो एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में जानी जाती हैं जो भारतीय नागरिकों के मन को सामाजिक आंदोलनों के विकास हेतु दृढ़तापूर्वक सोचने के लिए प्रेरित करती हैं, जो अपनी बुद्धि, प्रतिभा और परिश्रम को ईमानदार जनसेवा में के पिछड़े वर्गों के लिए शोधपरक समर्पित करती हैं, और जो समाज चिंतनशील अध्ययन किया है । डॉ. सुनीता पंद्रो ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अध्ययन किया है और समाज में पिछड़ी महिलाओं के उत्थान के लिए एक विद्वत्तापूर्ण अभियान चलाया है । समाजकल्याण की भावना से प्रेरित होकर वास्तविक कार्य करते हुए वे पिछले तीन दशकों से जनजागरण की मशाल जलाए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा घोषित विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्र्य करती हैं । उन्होंने पिछड़े वर्गों के जीवन में लोककल्याण का प्रभात लाया है ।
महत्वपूर्ण है कि डॉ. सुनीता पंद्रो ने बैगा जनजाति की महिलाओं की ऐतिहासिक संस्कृति : इस विषय पर शोध किया है 7 उन्होने बैगा जनजाति द्वारा अपनाई जाने वाली पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर भी शोध किया है। तदनुसार बैगा जनजाति की महिलाओं ( बैगा दाईओं ) के शरीर पर किए जाने वाले अंग-भेदन ( गोदना प्रथा ) का चिकित्सीय अध्ययन पूरा करके, डॉ. सुनीता पंद्रो ने वर्तमान पीढ़ी को सशक्त एवं प्राचीन भारतीय संस्कृति के लाभों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण कार्य किया है । इस माध्यम सें उन्होने भारत राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत एवं राष्ट्रीय धरोहर को जीवित रखा है इसी कारण हमारे परम्परा के संवर्धन में डॉ. सुनीता पंद्रो का अतुल्य योगदान रहा है।
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