अम्लेश्वर। सांकरा। भोथली। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज अम्लेश्वर सहित आसपास के गांव में जन्माष्टमी का त्योहार उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। ग्राम सांकरा और अम्लेश्वर के भोथली में दिनभर चली भगवान कृष्ण की पूजा पाठ।
सांकरा के युवा सरपंच रवि सिंगौर जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन दिखाई दिए वह खुद ही भजन कीर्तन करते हुए नजर आए गांव के लोगों के साथ उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति को भजन गाकर प्रस्तुत किया।
इसी प्रकार अमलेश्वर के भोथली में महिलाओं ने भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर शोभायात्रा निकाली जिसमें गांव की महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया शोभायात्रा ग्राम भोथली का संपूर्ण भ्रमण करते हुए गौठान में पहुंचा । इस दौरान गांव में काफी उत्सव का माहौल देखा गया बाजे गाजे पटाखे के साथ बच्चे नाचते हुए दिखाई दिए।
श्री कृष्ण कथा :-
हर वर्ष भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। द्वापर में श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद की अष्ठमी तिथि (रोहिणी नक्षत्र और चन्द्रमा वृषभ राशि में ) को मध्यरात्रि में हुआ। उनके जन्म लेते ही दिशाएं स्वच्छ व प्रसन्न और समस्त पृथ्वी मंगलमय हो गई थी। विष्णु के अवतार श्री कृष्ण के प्रकट होते ही जेल की कोठरी में प्रकाश फ़ैल गया। कृष्ण के प्राकट्य से स्वर्ग में देवताओं की दुन्दुभियां अपने आप बज उठीं तथा सिद्ध और चारण भगवान के मंगलमय गुणों की स्तुति करने लगे।
शास्त्रों में जन्माष्टमी के व्रत को एक हजार एकादशी व्रत के समान माना गया है। जाप का अनन्त गुना फल देने वाला जन्माष्टमी के दिन ध्यान, जाप और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। इसलिए जन्माष्टमी की रात में जागरण करके भगवान के भजन कीर्तन करने चाहिए।
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