रायपुर :- छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में चावल के स्टॉक में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। प्रदेशभर में संचालित उचित मूल्य दुकानों के बचत स्टॉक की जांच में यह खुलासा हुआ है कि करीब 900 राशन दुकानों में चावल की भारी कमी पाई गई। इस पर खाद्य विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कई दुकानों के आबंटन रद्द कर दिए हैं और कुछ संचालकों पर एफआईआर दर्ज कराई है।
खाद्य विभाग के आदेश के तहत 31 मार्च 2024 की स्थिति में प्रदेश के सभी 13,779 उचित मूल्य दुकानों के बचत स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया। इस सत्यापन के दौरान 894 दुकानों में कुल 7,891.73 टन चावल कम पाया गया। यह कमी सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़े अंतर की ओर इशारा करती है, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
विभाग की कड़ी कार्रवाई :-
जिन दुकानों में चावल की कमी पाई गई, उनके विरुद्ध विभाग ने तुरंत कदम उठाए। अब तक की कार्रवाई में—
- 101 दुकानों का आबंटन निलंबित किया गया।
- 72 दुकानों का आबंटन निरस्त कर दिया गया।
- 19 दुकानों के संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
- 194 दुकानों के विरुद्ध वसूली हेतु आरआरसी (राजस्व वसूली प्रमाण पत्र) जारी किए गए।
अधिकारियों का कहना है कि राशन दुकानों में बचत स्टॉक की कमी सीधा जनता के हक पर डाका डालने जैसा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पारदर्शिता पर जोर :-
खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बनाए रखने के लिए इस तरह के निरीक्षण आगे भी नियमित रूप से जारी रहेंगे। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरतमंद परिवारों को समय पर और निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न मिले। यह कार्रवाई राज्य में PDS प्रणाली को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और कठोर दंड से राशन दुकानों में अनियमितताओं पर लगाम लगाई जा सकती है, जिससे अंततः लाभार्थियों को ही फायदा होगा।
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