रायपुर। पंडवानी छत्तीसगढ़ की एक सांस्कृतिक धरोहर है वह छत्तीसगढ़ की पहचान है और यह एक सांस्कृतिक कला है जो छत्तीसगढ़ के इतिहास को दोहराती है। इसके संरक्षण और संवर्द्धन की जिम्मेदारी सम्पूर्ण प्रदेशवासियों की है।
इसी संदर्भ में विगत दिनों एक बैठक रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित श्री जैतुसाव मठ में आयोजित की गई। जिसमे प्रदेश भर के वरिष्ठ एवं नवोदित पण्डवानी गायक शामिल हुए। जिसमें प्रत्येक कलाकार को छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग द्वारा कलाकारों के हित में चलायी जाने वाली योजनाओं से सभी को लाभान्वित होने की जानकारी दी गई। साथ ही प्रदेश में आयोजित होने वाले उत्सवों, महोत्सवों में समस्त कलाकारों को मंच दिलाया जा सके इसलिए एकजुटता के साथ संस्कृति विभाग एवं राज्य शासन से समय समय पर अनुरोध करने की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई।
बैठक का प्रमुख उद्देश्य था कि समस्त पण्डवानी कलाकार एक संगठन से जुड़ें और अपनी बात एकजुटता के साथ शासन प्रशासन तक पहुँचा सकें। इसके लिए संगठन बनाने की बात पर सभी की सहमति भी प्राप्त हुई और सर्वसम्मति से , संगठन अध्यक्ष पद्मश्री उषा बारले को चुना गया , उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह चौहान और नवोदित पण्डवानी गायक दुष्यंत द्विवेदी को बनाया गया । सचिव चेतन देवांगन तथा सहसचिव, फूलसिंह कन्नौजे को बनाया गया, साथ ही कोषाध्यक्ष अर्जुन सेन तथा संगठन के संरक्षक की जिम्मेदारी वरिष्ठ पण्डवानी गायिका शान्ति बाई चेलक को दी गयी।
बैठक में प्रदेश के सैकड़ों कलाकार उपस्थित रहे,जिसमें मुख्य रूप से :- प्रभा यादव , अमृता साहू , प्रह्लाद निषाद , प्रेमशीला वर्मा , बिसोनी बाई , मीना बाई साहू , ऋतु वर्मा , यशोमति सेन , गंगा बाई मानिकपुरी , खेमिन निषाद , प्रेमनारायण साहू , खम्हन अस्तुरे , इंद्रा बाई जांगड़े , दुर्गा साहू , देवेंद्र वर्मा , जागेश्वर साहू , रामबाई साहू , युधिष्ठिर कन्नौज्जे , त्रिवेणी साहू , रोशनी नागवंशी , सोनम साहू , पूर्णिमा साहू सहित अनेक कलाकार उपस्थित रहे। अधिकारों के लिए शासन से निवेदन करने की बात पर मुहर लगाते हुए बैठक को समाप्त किया गया । एक विज्ञप्ति के माध्यम से दुष्यंत द्विवेदी ने यह जानकारी दी।
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