नई दिल्ली :- भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। युद्ध की संभवनाएं प्रबल है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत के कूटनीतिक एक्शन से तिलमिलाए पाकिस्तान ने परमाणु बम की गीदड़भभकी दी है। बौखलाहट में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार से लेकर कई नेता परमाणु बम की धौंस दे रहे हैं। ऐसे में सरहद-सेना और सियासत के चौथे एपिसोड में हम जानेंगे परमाणु हमले का आदेश कौन देता है। इसके साथ ही बताएंगे क्या होता न्युक्लियर फुटबॉल? भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। ऐसे में परमाणु बम का उपयोग विनाशकारी साबित होगा। क्योंकि परमाणु का तोड़ अभी तक किसी भी देश के पास नहीं है और न ही इससे ज्यादा शक्तिशाली कोई बम है।
क्या प्रधानमंत्री के टेबल में होता परमाणु विस्फोट का स्विच :-
दंत कथाओ में सुना गया है कि परमाणु का स्विच प्रधानमंत्री के टेबल में होता है, जिसकी जानकारी सिर्फ प्रधानमंत्री को ही होती है। युद्ध के समय यदि प्रधानमंत्री चाहें तो स्विच दबाकर हमला कर सकते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है। परमाणु अटैक का एक प्रोसेस होता है। उस प्रोसेस गुजरने के बाद परमाणु अटैक होता है। प्रधानमंत्री के टेबल में ऐसा कोई स्विच नहीं होता है, हालांकि उनके पास एक कोड जरूर होता है।
परमाणु हमले का आदेश भारत में कौन दे सकता है :-
परमाणु हमले का आदेश देने की ताकत किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष के पास होता है। यदि उस देश में प्रेसीडेंसी है तो राष्ट्रपति नहीं तो प्रधानमंत्री परमाणु हमले का आदेश दे सकता है। वहीं भारत के संदर्भ में बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास परमाणु हमले का आदेश देने का अधिकार है। हालांकि भारत में प्रधानमंत्री अकेले निर्णय नही ले सकता है, उसे परिस्थितियों के अनुसार अपनी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, चेयरमैन ऑफ़ चीफ ऑफ़ स्टाफ कमेटी से राय लेकर ही परमाणु हमला करने का निर्णय ले सकता है। परमाणु हमले के लिए प्रधानमंत्री के पास एक पासवर्ड होता है। इसी पासवर्ड के उपयोग से हमले का आदेश दिया जाता है।
परमाणु ब्रीफकेस (Nuclear Briefcase) :-
प्रधानमंत्री साथ SPG एक जवान ब्रीफकेस जैसा बॉक्स लेकर चलता है। इसे परमाणु ब्रीफकेस कहा जाता है। इसका वजन लगभग 20 किलो होता है। इसमें कंप्यूटर और रेडियो ट्रांसमिशन उपकरण आदि सामान होता है और यह बुलेट प्रूफ भी होता है। इस ब्रीफकेस में उन ठिकानों की जानकारी भी होती हैं जहां पर परमाणु हमला करना होता है। अभी तक लगभग 5000 ठिकानों की पहचान की जा चुकी है और समय-समय पर इनकी समीक्षा करके इसमें नए ठिकानों को जोड़ा जाता है।
परमाणु अटैक हमले का ये है पूरा प्रोसेस
पीएम के स्मार्ट कोड के अलावा दो अन्य कोड होते हैं, जो कि लॉकर में बंद होते हैं और ये कहां रखे हैं इन्हें हर कोई नही जानता है। सेना में परमाणु बैटरी यूनिट वायुसेना के कमांडिंग ऑफिसर से साथ दो अन्य अधिकारी होते हैं इनके पास अलग – अलग लॉकर होते हैं। इन्हें सेफ कोड कहते हैं। इन सेफ़ों को रखने की जगह को समय समय पर बदल दिया जाता है। प्रधानमंत्री का स्मार्ट कोड मिलने के बाद कमांडिग ऑफिसर अधिकारियों को कोड बताता है। इसके बाद उसका मिलान किया जाता है। कोड सही पाए जाने पर वैज्ञानिक आदेश पाते ही हमला कर देते हैं।
क्या होता है न्यूक्लियर फुटबॉल :-
न्यूक्लियर फुटबॉल संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को अधिकृत करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक ब्रीफकेस है। इसे आधिकारिक तौर पर “प्रेसीडेंशियल इमरजेंसी सैचेल” कहा जाता है। यह ब्रीफकेस राष्ट्रपति के साथ हर समय रहता है, और इसमें परमाणु हथियारों के उपयोग के लिए आवश्यक सभी जानकारी और उपकरण होते हैं।
पाकिस्तान के पास कितने परमाणु हथियार..?
1999 में अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी ने एक अनुमान लगाया था कि 2020 तक पाकिस्तान में 60 से 80 परमाणु हथियार होंगे, लेकिन पाकिस्तान ने खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के बावजूद इसकी अंधी दौड़ में अब तक आधिकारिक तौर पर कुल 170 परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं, जो जल,थल और नभ में मार कर सकता है। परमाणु विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल के अंत तक यह संख्या 200 तक बढ़ सकती है।
भारत के पास कितने परमाणु हथियार..?
आर्म्स कंट्रोल एंड नॉन प्रोलिफरेशन के अनुसार भारत के शस्त्रागार में 10 से 40 किलोटन हथियार हैं। 2022 तक देश में परमाणु हथियारों की संख्या 160 थी, जो 2024 तक बढ़कर करीब 180 से ज्यादा हो चुकी हैं। भारत न केवल परमाणु हथियारों की संख्या के मामले में पाकिस्तान से आगे है, बल्कि मारक क्षमता के मामले में उससे तीन गुना ज्यादा हैसियत और ताकत रखता है।
सिर्फ एक बार किया गया परमाणु हमला :-
6 अगस्त 1945 को लिटिल बॉय परमाणु बम के विस्फोट के बाद हिरोशिमा पर मशरूम बादल। हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बमबारी इतिहास में परमाणु हथियारों का पहला और एकमात्र युद्धकालीन उपयोग है। आज तक, सशस्त्र संघर्ष में परमाणु हथियारों का एकमात्र उपयोग 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिकी परमाणु बमबारी के साथ हुआ था।
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