छत्तीसगढ़ की साय ही नहीं, देश की मोदी सरकार की साख पर भी बट्टा लगा रहे हैं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल। उनके चलते राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत 12000 कर्मचारियों को मार्च माह का वेतन अब तक नहीं मिला है। बहुतों की तो महीने दो महीने की सैलरी रुकी पड़ी है। मतलब साफ है नियमित वेतन की गारंटी अब मिशन में नहीं है। ऐसे में जिन कर्मचारियों की EMI कटती है वो थोड़े ज्यादा परेशान है। ऐसे हालात पहले कभी नहीं थे।
यहां भी CGMSC जैसा ही किस्सा है। CGMSC में दवा खरीदी के लिए आई राशि घोटालेबाजों को सौंप दी गई थी वैसे ही यहां NHM में कर्मचारी के वेतन की राशि से वेंडरों का भुगतान कर दिया गया। विभागीय मंत्री, अधिकारी कमीशन के चक्कर में क्या क्या न कर डाले।
इनकी जुर्रत तो देखिए कि Narendra Modi सरकार PMO India National Health Authority द्वारा संचालित स्वास्थ्य योजनाओं में बिना डरे ये गड़बड़ी कर रहे है। इन्हें लगता है, प्रदेश में सब सोए हुए है और दिल्ली तक शिकायत कोई पहुंचाने से रहा। पर यही इनकी गलतफहमी है। आपकी हर गलती दस्तावेजों में कैद हो रही है यह मत भूलिए।
और हा, मैं किसी मंत्री और विभाग के प्रति पूर्वाग्रह से नहीं हूं। जो सामने दिखता है वो ही लिखता हूं। कुछ अच्छा अगर हो तो तारीफ करने में कोई दिक्कत नहीं है। पर कुछ अच्छा करें तो सही।
यहां पर अति आवश्यक सेवाओं से जुड़े स्वास्थ्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा बेहद जरूरी है। वो अगर मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे, तो ही स्वस्थ छत्तीसगढ़, स्वस्थ भारत का निर्माण हो सकेगा। शायद प्रधानमंत्री मोदी जी की भी भावना यही है। परंतु छत्तीसगढ़ में इस भावना से कार्य नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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