भूलकर भी इस महाशिवरात्रि भोलेनाथ को अर्पित ना करें ये 4 चीजें, दुर्भाग्य से हो सकता है सामना धार्मिक दस्तावेजों के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जहां कुछ ग्रंथ यह कहते हैं कि इसी दिन शिव-पार्वती का मिलन हुआ था वहीं कुछ धार्मिक ग्रंथ इस बात को उल्लिखित करते हैं कि जिस दिन पहली बार भगावन शिव के प्रतीक माने जाने वाले शिवलिंग का धरती पर उद्भव हुआ था उसे ही महाशिवरात्रि कहा जाता है।
भूलकर भी इस महाशिवरात्रि भोलेनाथ को अर्पित ना करें ये 4 चीजें :-
इस वर्ष 8 मार्च 2024 को महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाएगा, जो शिव भक्तों और शैव धर्मावलंबियों के लिए बेहद खास माना जाता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हिन्दू धर्म के अंतर्गत मौजूद हर देवी-देवता से संबंधित कुछ विशिष्ट वस्तुएं हैं जिन्हें उनकी पूजा में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए। मान्यता अनुसार ऐसा करने से वे अवश्य प्रसन्न होते हैं और भक्त पर अपने कृपया रखते है। वहीं कुछ ऐसी वस्तुओं का उल्लेख भी मिलता है जिन्हें उ विशिष्ट आराध्य की पूजा में शामिल करना व्यक्ति को पाप का भागी बना सकता है। इस लेख में हम उन्हीं वस्तुओं के विषय में आपको बताएंगे जिनका उपयोग शिव पूजा में बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए, अन्यथा दुर्भाग्य आपके पीछे आ सकता है।
भगवान शिव को सिंदूर चढ़ाना है वर्जित :-
भगवान शिव के अतिरिक्त समस्त देवी देवताओ को सिंदूर चढ़ाया जाता है, परंतु शिव पूजन में सिंदूर का उपयोग निषेध है। मान्यता है शिव पुरुषत्व के प्रतीक हैं और सिंदूर महिलाओं से संबधित है इसलिए शिव को सिंदूर अर्पित नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि सजहीव संहारक है, वे विनाशक है और सिंदूर का संबध दीर्घायु से है।
हल्दी अर्पित करना है वर्जित :-
जिस तरह सिंदूर का संबंध स्त्रियों से है उसे तरह हल्दी भी स्त्री तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। शिवलिंग पुरुष तत्व है इसलिए इसपर हल्दी का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
तुलसी का पत्ता है वर्जित :-
पौराणिक कथा अनुसार छल से भगवान शिव ने वृंदा (तुलसी) के दैत्य पति का वाढ किया था, इसलिए अत्याधिका पवित्र और पूजन योग्य होने के बावजूद शिव की पूजा में तुलसी का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाता।
शंख होता है वर्जित :-
पौराणिक कथा अनुसार, भगवान शिव ने भगवान विष्णु के प्रिय भक्त शंखचूड़ नामक एक असुर का वध किया था। पूजा में उपयोग किया जाने वाला शंख उसी असुर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए शिव पूजा में शंख का प्रयोग पूर्ण रूप से वर्जित माना जाता है।
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