रायपुर :- ऑनलाइन मंडी प्लेटफार्म ई-नाम (e-Nam) यानी राष्ट्रीय कृषि बाजार से अब 1361 मंडियां जुड़ चुकी हैं. देश की 2000 मंडियों को अगले कुछ ही वर्ष में इससे जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है. इस प्लेटफार्म से करीब 1.77 करोड़ किसान जुड़ चुके हैं. दरअसल, इस प्लेटफार्म के आने के बाद किसान और खरीदार के बीच का सीधा संबंध और गहरा हुआ है. दलालों की भूमिका काफी हद तक खत्म हो गई है. इस प्लेटफार्म का 27 सूबों में विस्तार हो चुका है. इससे किसानों को अपनी कृषि उपज का कारोबार करने में बड़ी मदद मिल रही है. वो एक बड़े दायरे में उपज बेच पा रहे हैं. इस प्लेटफार्म पर 193 कमोडिटी की ट्रेडिंग हो रही है.

ई-नाम एक इलेक्ट्रॉनिक कृषि पोर्टल है. जो पूरे भारत में मौजूद एग्री प्रोडक्ट मार्केटिंग कमेटी को एक नेटवर्क में जोड़ने का काम करता है. इसका मकसद एग्रीकल्चर प्रोडक्ट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बाजार उपलब्ध करवाना है. इस नेटवर्क से 3,366 एफपीओ का जुड़ना किसी बड़े दांव से कम नहीं है.
कैसे होता है ट्रेड :-
फार्मगेट मॉड्यूल का उपयोग करके कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा सहित 11 राज्यों के किसानों ने मक्का, कपास, धान, कच्चा केला और सब्जियों जैसी कई वस्तुएं बेची हैं. दरअसल, यह मॉड्यूल कृषि घाटे के साथ-साथ परिवहन और हैंडलिंग खर्च को कम करता है. किसान ई-एनएएम प्लेटफॉर्म पर अपने निकटतम एपीएमसी मंडियों के माध्यम से खेत से वस्तुओं के लॉट साइज की तस्वीरें अपलोड करते हैं. मंडियों में रजिस्टर्ड खरीदार कृषि उपज के लिए बोली लगाते हैं और किसानों के बैंक खाते में भुगतान करने के बाद फार्मगेट से वस्तुओं को उठा लेते हैं.

ऑफलाइन ट्रेनिंग बंद करना चाहिए :-
एफसीआई और नेफेड कृषि उपज की जितनी ऑफलाइन ट्रेनिंग करते हैं उसे बंद करके उसका ई-नाम पर ट्रेड शुरू करने की जरूरत है. ऑनलाइन ट्रेडिंग को बढ़ावा देने से किसानों को अच्छा दाम मिलेगा और उपभोक्ताओं को फायदा होगा. क्योंकि किसान के कंज्यूमर के बीच की कई कड़ियों का काम खत्म हो जाएगा. कारोबार में जितने कम भागीदार होंगे किसानों और उपभोक्ताओं को उतना ही फायदा होगा. ऑनलाइन ट्रेड बढ़ने से देश में ईंधन की काफी बचत होगी.
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