September 14, 2026

Blog

अमलेश्वर। । दुर्ग जिले के अंडा स्थित शैल देवी महाविद्यालय में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू कराने के नाम पर 12 लाख 39 हजार 483 रुपए की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि ठगों ने खुद को एचसीएल टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग से जुड़ा बताया और कॉलेज प्रबंधन को ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव भेजा। भरोसा कायम करने के लिए कॉलेज का भौतिक मुआयना भी कराया गया। इसके बाद उपकरण, डीजी सेट, परिवहन और बीमा सहित अलग-अलग मदों के नाम पर कई बार रकम जमा कराई गई। जब रकम लेने के बाद संबंधित लोगों से संपर्क बंद हो गया और ई-मेल का जवाब भी नहीं मिला, तब कॉलेज प्रबंधन को ठगी का संदेह हुआ। मामले में कॉलेज अध्यक्ष राजन कुमार दुबे की शिकायत पर नेवई पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है। कॉलेज अध्यक्ष राजन कुमार दुबे के मुताबिक, 12 अप्रैल 2025 को कॉलेज के आधिकारिक ई-मेल पर एचसीएल टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग के नाम से एक मेल आया था। इसमें कॉलेज में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया था। मेल में वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति का मोबाइल नंबर भी दिया गया था। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की उससे लगातार बातचीत होने लगी। 17 अप्रैल को कॉलेज के ई-मेल पर एक समझौता पत्र भेजा गया। इसके बाद कॉलेज के भौतिक निरीक्षण के लिए बुल आई नाम की संस्था से एक व्यक्ति के आने की जानकारी दी गई। 18 अप्रैल को ए.के. साहू नाम का व्यक्ति कॉलेज पहुंचा। उसने भवन और परिसर की तस्वीरें लीं तथा कॉलेज का मुआयना किया। जाते समय उसने जांच रिपोर्ट भेजने की बात कही।
1 मई को दोपहर 3 बजे से 3.15 बजे तक कॉलेज अध्यक्ष और प्राचार्य कामेश्वर नाथ मिश्रा की जूम मीटिंग हुई। इसमें एचसीएल टेक्नोलॉजी की अनीता नाम की महिला से बातचीत हुई। इसके बाद 5 मई को गोपनीयता और साझेदारी से जुड़े दस्तावेज कॉलेज के ई-मेल पर भेजे गए। कॉलेज प्रबंधन ने 8 मई को इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर वापस भेज दिए।
19 मई को कॉलेज को परीक्षा सेंटर के उपकरणों के लिए 5 लाख 98 हजार 743 रुपए का बिल भेजा गया। इसमें एक निजी फर्म का बैंक खाता दिया गया था। कॉलेज ने 21 मई को अपने बैंक खाते से उक्त राशि का भुगतान कर दिया। इसके बाद 23 मई को 58.5 केवी डीजी सेट के नाम पर 3 लाख 42 हजार 200 रुपए की मांग की गई। कॉलेज ने 26 मई को यह रकम भी बताए गए खाते में जमा कर दी। दोनों भुगतानों के जरिए कॉलेज से अब तक 9 लाख 40 हजार 943 रुपए जमा कराए जा चुके थे।
11 जून को कॉलेज को सामान भेजने और बीमा के नाम पर दो अलग-अलग रकम जमा करने के लिए कहा गया। परिवहन के लिए 1 लाख 35 हजार 700 रुपए और बीमा के लिए 1 लाख 62 हजार 840 रुपए मांगे गए। कॉलेज ने 13 जून को दोनों रकम का भुगतान कर दिया। इस तरह इन दोनों भुगतानों के जरिए 2 लाख 98 हजार 540 रुपए और जमा कराए गए। शिकायत के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन 12 अप्रैल से 14 जून तक वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति के संपर्क में रहा। 15 जून के बाद संबंधित मोबाइल नंबर बंद हो गया। ई-मेल का जवाब भी आना बंद हो गया। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन को ठगी का संदेह हुआ। ठगी की आशंका सामने आने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को शिकायत के साथ दो शिकायत नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं।
जांच में जुटी पुलिस नेवई पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, ई-मेल आईडी, बैंक खातों और रकम के लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ऑनलाइन परीक्षा सेंटर के नाम पर कॉलेज प्रबंधन से संपर्क करने वाले लोग वास्तव में किसी संस्था से जुड़े थे या फर्जी पहचान के जरिए ठगी की गई। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

error: Content is protected !!