आरंग। रायपुर ग्रामीण इलाके में अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ पुलिस ने तो शिकंजा कस दिया है, लेकिन इस पूरी मुस्तैदी ने आबकारी विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरंग, मंदिर हसौद और खरोरा क्षेत्र में पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों से यह सवाल गहरा गया है कि जिस विभाग का मुख्य काम शराब तस्करी रोकना है, वह आखिर कहां सोया हुआ है?
ताजा मामले में मंदिर हसौद पुलिस ने 3 शराब तस्करों को 100 पौवा देशी शराब और नगदी के साथ गिरफ्तार किया है, वहीं 6 अन्य लोगों पर आबकारी व प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत शिकंजा कसा गया है।
45 दिनों के आंकड़े: आबकारी बेखबर, पुलिस लगातार कर रही बरामदगी
रायपुर ग्रामीण के महज तीन थानों में बीते डेढ़ महीने (45 दिन) के भीतर दर्ज आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र में अवैध शराब का नेटवर्क किस कदर फैला हुआ है। आरंग थाना में 26 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 35 आरोपियों को गिरफ्तार 675 पौवा अवैध शराब जब्त किया गया है। वहीं मंदिर हसौद थाना में 26 मामले दर्ज कर 26 आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ 423 पौवा शराब बरामद किया गया है। इसी तरह खरोरा थाना में दर्ज 26 मामलों में 513 पौवा अवैध शराब जब्त किया गया है।
इस तरह से केवल तीन थानों की पुलिस ने 45 दिनों में 1,600 से अधिक पौवा अवैध शराब बरामद की है। आबकारी अमले की गैर-मौजूदगी और निष्क्रियता के बीच इतनी बड़ी मात्रा में हो रही तस्करी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सरकारी दुकानों से हो रही तस्करी
मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि खुद सरकारी शराब दुकानों के कर्मचारी कोचियों को बड़े पैमाने पर शराब की सप्लाई कर रहे हैं। हाल ही में आरंग पुलिस द्वारा गुल्लू शराब दुकान पर की गई कार्रवाई में सुपरवाइजर, सेल्समैन, मल्टी-वर्कर और एक संकुल समन्वयक शिक्षक समेत 7 लोगों को शराब तस्करी करते रंगे हाथ पकड़ा गया। जब सरकारी तंत्र के कारिंदे ही तस्करी में शामिल हों, तब जिम्मेदार आबकारी अधिकारियों की भूमिका पर संदेह उठना स्वाभाविक है।







