दुर्ग। निवेश पर हर महीने 10 प्रतिशत लाभ देने का कथित झांसा देकर लोगों से बड़ी रकम निवेश कराने के मामले में सुपेला पुलिस ने HDFC बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत राजकुमार तिवारी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि आरोपी अपने पद का फायदा उठाकर बड़ी रकम वाले खाताधारकों की जानकारी हासिल करता था और फिर उन्हें गोल्ड ईटीवी में निवेश कर अधिक लाभ कमाने का प्रलोभन देता था। निवेशकों से मिले चेक कथित मुख्य आरोपी योगेश साहू के खाते में जमा किए जाते थे। निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए शुरुआती दौर में राजकुमार अपने खाते से लाभांश की रकम भी देता था।
सुपेला पुलिस के मुताबिक मामला अपराध क्रमांक 961/2026 से संबंधित है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(4), 61(2) और 111(4) के तहत कार्रवाई की जा रही है। मामले की शुरुआत सेक्टर-7 भिलाई निवासी राजू नामदेव की शिकायत से हुई। शिकायत में बताया गया कि योगेश साहू और अन्य लोगों ने निवेश करने पर प्रतिमाह 10 प्रतिशत लाभांश देने का प्रलोभन दिया था। योजना को विश्वसनीय साबित करने के लिए कथित तौर पर अन्य ग्राहकों के बैंक खातों के स्टेटमेंट भी दिखाए गए।
शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपियों की बातों पर विश्वास कर उसने 21 मार्च 2025 को 15 लाख रुपए बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर किए थे। शुरुआत में उसके खाते में लाभांश की रकम आती रही, लेकिन कुछ समय बाद भुगतान बंद हो गया। रकम वापस मांगने पर लगातार आश्वासन दिया जाता रहा। बाद में उसे पता चला कि अन्य निवेशकों से भी इसी तरह बड़ी रकम ली गई है। शिकायत मिलने के बाद सुपेला पुलिस ने अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। विवेचना के दौरान शिकायतकर्ता के साथ अन्य निवेशकों के बयान लिए गए। बैंक खातों, लेन-देन और लाभांश भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की गई। पुलिस के अनुसार निवेशक मोहम्मद रफी, साधना मिश्रा और शिबा शेख सहित अन्य लोगों के कथनों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के दौरान राजकुमार तिवारी की कथित भूमिका सामने आई।
पुलिस का दावा है कि राजकुमार तिवारी HDFC बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत रहते हुए बड़ी रकम वाले खाताधारकों की जानकारी प्राप्त करता था। इसके बाद ऐसे लोगों से संपर्क कर उन्हें गोल्ड ईटीवी में निवेश करने और हर महीने 10 प्रतिशत लाभांश मिलने का कथित प्रलोभन दिया जाता था। पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि निवेशकों से चेक लेकर रकम मुख्य आरोपी बताए गए योगेश साहू के खाते में जमा कराई जाती थी। निवेशकों का भरोसा कायम रखने के लिए शुरुआती अवधि में लाभांश के नाम पर राजकुमार तिवारी के खाते से रकम दिए जाने संबंधी साक्ष्य भी मिलने का दावा पुलिस ने किया है।
इन्हीं तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने राजकुमार तिवारी को आरोपी बनाया। उसे हिरासत में लेकर गवाहों के समक्ष मेमोरेंडम कथन लिया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। गिरफ्तार राजकुमार तिवारी की उम्र 37 वर्ष है और वह नेहरू नगर ईस्ट, भिलाई का रहने वाला है। पुलिस मामले में बैंक खातों, निवेश से जुड़े लेन-देन और लाभांश भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
पुलिस अब पूरे निवेश नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। प्रकरण में विधिसम्मत साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है। दुर्ग पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित संस्था और योजना की वैधता की स्वतंत्र रूप से जांच जरूर करें। असामान्य रूप से अधिक या निश्चित लाभ देने का दावा करने वाली योजनाओं में बिना सत्यापन रकम निवेश न करें। संदिग्ध निवेश प्रस्ताव या लेन-देन की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की सलाह दी गई है।







