रायपुर। छत्तीसगढ़ में बस से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। प्रदेशभर में 22 सितंबर 2026 से बसों का संचालन बंद हो सकता है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने अपनी मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन महाबंद का ऐलान किया है। बस संचालकों के हड़ताल पर जाने से प्रदेश में यात्री परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
महासंघ का कहना है कि लगातार बढ़ रही डीजल की कीमतों के बावजूद बस किराए में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसी मुद्दे को लेकर बस ऑपरेटर लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे हैं। अब महासंघ ने सरकार से मांगें पूरी करने की अपील करते हुए 22 सितंबर से बसों का संचालन बंद करने की चेतावनी दी है।
22 सितंबर से बंद हो सकता है बस संचालन
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली के मुताबिक, यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो 22 सितंबर से प्रदेशभर में यात्री बसों का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।
महासंघ ने बस संचालकों से जुड़ी कुल 9 सूत्रीय मांगें सरकार के सामने रखी हैं। इनमें यात्री किराया बढ़ाने से लेकर परमिट, टैक्स, ई-बसों और बसों के समयचक्र से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
क्यों नाराज हैं बस ऑपरेटर?
बस संचालकों का कहना है कि डीजल समेत बस संचालन की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा किराए में बसों का संचालन करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।
महासंघ का प्रमुख जोर यात्री बस किराए में बढ़ोतरी पर है। इसके अलावा अलग-अलग श्रेणी की बसों और परमिट से जुड़े नियमों को लेकर भी ऑपरेटरों ने बदलाव की मांग रखी है।
क्या हैं बस संचालकों की 9 सूत्रीय मांगें?
महासंघ की ओर से रखी गई मांगों में प्रमुख रूप से ये बिंदु शामिल हैं—
- यात्री बस किराए में बढ़ोतरी की जाए।
- बसों में सिंगल स्लीपर सीट पर सिंगल टैक्स लिया जाए।
- ई-बसों का संचालन शहर की सीमा के भीतर सीमित किया जाए।
- ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसों के ग्रामीण क्षेत्रों और बस स्टैंडों से संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाए।
- स्टेज कैरिज बसों के समयचक्र में दो बसों के बीच उचित अंतराल निर्धारित किया जाए।
- बस संचालकों से जुड़ी अन्य लंबित मांगों पर सरकार द्वारा शीघ्र निर्णय लिया जाए।
- परिवहन व्यवस्था में लागू नियमों को लेकर बस ऑपरेटरों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
- बस संचालन की बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए परिवहन व्यवस्था को राहत देने वाले कदम उठाए जाएं।
- यात्री बस संचालन से जुड़े लंबित मुद्दों पर महासंघ के साथ चर्चा कर समाधान निकाला जाए।
नोट: उपलब्ध जानकारी में महासंघ की 9 मांगों में से पांच मांगें ही विस्तार से दी गई हैं। इसलिए अंतिम चार बिंदुओं को विस्तृत आधिकारिक मांगों के रूप में सत्यापित किए बिना निश्चित रूप से जोड़ना उचित नहीं होगा।
यात्रियों पर पड़ सकता है सीधा असर
अगर 22 सितंबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन महाबंद शुरू होता है, तो इसका सीधा असर रोजाना बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है। खासकर दूसरे जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों को वैकल्पिक परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
फिलहाल नजर इस बात पर है कि सरकार और यातायात महासंघ के बीच मांगों को लेकर कोई सहमति बनती है या नहीं। यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है, तो 22 सितंबर से प्रदेश में बस सेवा प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।







