राजनांदगांव जिले में फर्जी तरीके से सिम कार्ड एक्टिवेट कर बेचने के मामले में गैंदाटोला थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी मनीष कुमार शांडिल्य को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से बड़ी संख्या में बिना एक्टिवेट सिम कार्ड, मोबाइल फोन, बायोमैट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन और नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी पहले जीवो कंपनी में काम करता था। इसी दौरान उसे सिम एक्टिवेशन से जुड़ी सुविधाओं और प्रक्रियाओं की जानकारी मिली। आरोप है कि उसने इसी जानकारी और उपलब्ध संसाधनों का दुरुपयोग करते हुए फर्जी तरीके से सिम कार्ड एक्टिवेट किए और उन्हें दूसरे लोगों को बेचकर अवैध कमाई की।
शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच
यह मामला गैंदाटोला थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस को पोखन मोबाइल पीओएस संचालक, गैंदाटोला की शिकायत मिली थी। शिकायत में फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट करने, उन्हें बेचने और धोखाधड़ी किए जाने की बात सामने आई थी।
शिकायत के आधार पर गैंदाटोला थाने में अपराध क्रमांक 14/2025 दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 61(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(सी) के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की। पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में पहले ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था और उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया था।
घटना के बाद से फरार था आरोपी
मामले में आरोपी मनीष कुमार शांडिल्य, पिता सुरेश शांडिल्य, उम्र 25 वर्ष, निवासी ग्राम बम्हनीभाठा, थाना डोंगरगांव, जिला राजनांदगांव, घटना के बाद से फरार चल रहा था।
पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। संभावित ठिकानों पर दबिश और उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसकी तलाश की जा रही थी। आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी से क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस की कार्रवाई में आरोपी के कब्जे से कई महत्वपूर्ण सामान मिलने की बात कही गई है, जिनमें शामिल हैं:
- बड़ी संख्या में बिना एक्टिवेट सिम कार्ड
- मोबाइल फोन
- बायोमैट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन
- नकदी
- सिम एक्टिवेशन से संबंधित अन्य सामग्री
बरामद सामान की वजह से पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फर्जी तरीके से कितने सिम कार्ड एक्टिवेट किए गए और इन्हें किन-किन लोगों को बेचा गया था।
फर्जी सिम से बढ़ सकता है सुरक्षा का खतरा
फर्जी तरीके से जारी या एक्टिवेट किए गए मोबाइल सिम कार्ड का इस्तेमाल केवल सामान्य मोबाइल कनेक्शन के लिए ही नहीं, बल्कि धोखाधड़ी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में भी किया जा सकता है। यही वजह है कि सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में ग्राहक की पहचान और बायोमैट्रिक सत्यापन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस मामले में भी पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने कथित तौर पर किन प्रक्रियाओं और सुविधाओं का दुरुपयोग किया और इस नेटवर्क में उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े थे।
आगे की जांच में सामने आ सकती हैं नई जानकारियां
मनीष शांडिल्य की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले की जांच को आगे बढ़ा रही है। अब बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य सामान की जांच के साथ-साथ कथित तौर पर एक्टिवेट किए गए सिम कार्ड के इस्तेमाल और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा सकती है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि इस पूरे मामले का नेटवर्क कितना बड़ा था और फर्जी सिम कार्ड के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया।
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में एक और फरार आरोपी की गिरफ्तारी हुई है। इस गिरफ्तारी से फर्जी सिम एक्टिवेशन और बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
नोट: यह रिपोर्ट पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और दर्ज मामले के विवरण पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।






