मोदी सरकार का ‘सस्ता सोना’ यानी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 की सीरीज III में जिन निवेशकों ने पैसा लगाया है आज उनकी रकम चार गुने से अधिक हो गई है। इस सीरीज के निवेशकों के लिए एक और बड़ी खबर है। ऐसे निवेशक आज 14 अगस्त 2026 से समय से पहले रिडेम्पशन का विकल्प चुन सकते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने प्रति यूनिट रिडेम्पशन मूल्य ₹15,310 तय किया है। यह उन निवेशकों के लिए ₹3,449 प्रति ग्राम के इश्यू प्राइस से काफी अधिक है, जिन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया था। यह बॉन्ड 14 अगस्त 2019 को जारी हुआ था, इसलिए यह सात साल की होल्डिंग अवधि पूरी होने का मामला है।
रिडेम्पशन मूल्य और निवेशकों को होने वाला फायदा
₹15,310 प्रति यूनिट के इस भाव पर शुरुआती निवेश के मुकाबले सीधा मुनाफा ₹11,861 प्रति यूनिट बनता है। यह करीब 343.9 फीसदी का फायदा है, जिसमें होल्डिंग अवधि के दौरान मिलने वाला ब्याज शामिल नहीं है। रिडेम्पशन मूल्य RBI के नियमों के तहत रिडेम्पशन तारीख से पहले के तीन कारोबारी दिनों में 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के साधारण औसत पर आधारित होता है।
ये भाव इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी IBJA की ओर से जारी किए जाते हैं। नियमों के मुताबिक SGB में इश्यू की तारीख से पांच साल पूरे होने के बाद ब्याज भुगतान वाली तारीख पर समय से पहले रिडेम्पशन की सुविधा मिलती है।
₹3499 प्रति ग्राम पर लिया था सोना
सॉवरेन गाल्ड बॉन्ड की तीसरी सीरीज को ₹3,499 प्रति ग्राम पर जारी किया गया था, लेकिन ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल भुगतान करने वालों को ₹50 प्रति ग्राम की छूट दी गई थी। इससे उनके लिए प्रभावी इश्यू प्राइस ₹3,449 प्रति ग्राम हो गया। अगर किसी ने ऑनलाइन इश्यू प्राइस पर ₹1 लाख का निवेश किया था, तो उसे करीब 28.99 यूनिट मिली होंगी।
₹15,310 प्रति यूनिट के हिसाब से समय से पहले रिडेम्पशन पर इन यूनिट्स की कीमत लगभग ₹4.44 लाख बनती है। इस तरह ब्याज जोड़ने से पहले करीब ₹3.44 लाख का सीधा मुनाफा बनता है। सात साल में रिडेम्पशन वैल्यू में हुई बढ़त से सालाना रिटर्न करीब 23.7 फीसदी बैठता है।
ब्याज का हिस्सा अलग से मिला
SGB निवेशकों को मूल निवेश पर 2.5 फीसदी सालाना ब्याज भी मिलता था, जो हर छह महीने में दिया जाता था। यह ब्याज सोने की कीमत से जुड़े कैपिटल गेन से अलग है। RBI के SGB नियमों में 2.5 फीसदी फिक्स्ड सालाना ब्याज और आठ साल की परिपक्वता का प्रावधान है।
पांचवें साल के बाद ब्याज भुगतान वाली तारीखों पर समय से पहले रिडेम्पशन की अनुमति होती है। जिन निवेशकों ने ऑफलाइन इश्यू प्राइस ₹3,499 पर खरीदारी की थी, उन्हें भी बड़ा फायदा हुआ है, हालांकि प्राइस बढ़त से मिलने वाला उनका रिटर्न ऑनलाइन वालों की तुलना में थोड़ा कम रहेगा।
क्या आज रिडीम करना सही रहेगा? टैक्स नियम समझें
ऊपर दिख रहे बड़े रिटर्न को नए टैक्स नियमों के साथ देखना जरूरी है। 1 अप्रैल 2026 से SGB रिडेम्पशन पर कैपिटल गेन्स छूट को सीमित कर दिया गया है। वित्त विधेयक 2026 में कहा गया है कि छूट तभी लागू होगी जब कोई व्यक्ति SGB को मूल इश्यू की तारीख से लेकर परिपक्वता तक लगातार होल्ड करे। बजट 2026 के सरकारी FAQs से यह भी साफ है कि पांच साल की लॉक-इन अवधि पूरी होने के बाद भी समय से पहले रिडेम्पशन पर यह छूट नहीं मिलती।
इसका मतलब यह है कि 2019-20 की तीसरी सीरीज का कोई मूल निवेशक भले ही सात साल से बॉन्ड होल्ड कर रहा हो, लेकिन आज समय से पहले रिडेम्पशन कराने पर कैपिटल गेन्स छूट का दावा नहीं कर सकता। टैक्स छूट का फायदा SGB को तय मेच्योरिटी तक होल्ड करने से जुड़ा है। साथ ही, सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB पर भी यह छूट नहीं मिलती, क्योंकि छूट केवल उन्हीं व्यक्तियों के लिए है, जिन्होंने मूल इश्यू में सब्सक्राइब किया और मेच्योरिटी तक लगातार होल्ड किया।
SGB 2019-20 सीरीज III के होल्डर्स के लिए आंकड़े काफी अच्छे हैं। सात साल में सोने से जुड़ी वैल्यू लगभग 4.4 गुना बढ़ चुकी है और निवेशकों को होल्डिंग अवधि के दौरान 2.5 फीसदी सालाना ब्याज भी अलग से मिला है। हालांकि, आज समय से पहले रिडेम्पशन करने का फैसला करते समय टैक्स छूट न मिलने की वजह से अपनी टैक्स देनदारी का आकलन जरूर कर लेना चाहिए।





