भारतीय क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने हाल ही में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया। लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम की अहम कड़ी रहे रहाणे के संन्यास के बाद क्रिकेट जगत में उनकी उपलब्धियों को याद किया जा रहा है। इसी बीच भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने रहाणे को लेकर बड़ा बयान दिया है।
गावस्कर ने कहा कि रहाणे को वह सम्मान और श्रेय कभी नहीं मिला, जिसके वह वास्तविक हकदार थे। उन्होंने रहाणे की तुलना भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ से करते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों की कप्तानी और योगदान को कई बार नजरअंदाज किया गया।
रहाणे का शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर
अजिंक्य रहाणे ने साल 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने करियर में उन्होंने तीनों फॉर्मेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
उनके आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- टेस्ट मैच: 85
- वनडे मैच: 90
- T20 इंटरनेशनल: 20
टेस्ट क्रिकेट में रहाणे ने—
- 5077 रन बनाए।
- बल्लेबाजी औसत 38.46 रहा।
- 12 शतक और 26 अर्धशतक लगाए।
हालांकि, उनका सबसे यादगार प्रदर्शन 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर देखने को मिला, जब उन्होंने मुश्किल हालात में भारतीय टीम की कप्तानी संभाली।
ऑस्ट्रेलिया में रहाणे ने लिखी ऐतिहासिक जीत की कहानी
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2020-21 भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार सीरीज में शामिल है।
एडिलेड टेस्ट में भारतीय टीम दूसरी पारी में केवल 36 रन पर सिमट गई थी। इसके बाद नियमित कप्तान विराट कोहली भारत लौट गए थे। ऐसे मुश्किल समय में अजिंक्य रहाणे ने टीम की कमान संभाली।
रहाणे की कप्तानी में भारत ने—
- ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से हराया।
- ऐतिहासिक गाबा टेस्ट में जीत दर्ज की।
- कई प्रमुख खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में शानदार प्रदर्शन किया।
मेलबर्न टेस्ट में रहाणे ने शानदार शतक लगाकर टीम को जीत की राह पर लौटाया था। उन्होंने 223 गेंदों पर 112 रन की यादगार पारी खेली थी।
गावस्कर बोले- रहाणे को नहीं मिला कप्तानी का पूरा श्रेय
सुनील गावस्कर ने अपने कॉलम में लिखा कि रहाणे की कप्तानी का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा।
उन्होंने कहा—
- रहाणे ने छह टेस्ट मैचों में कप्तानी की।
- इनमें भारत ने चार मुकाबले जीते।
- कोई टेस्ट मैच नहीं हारा।
- दो मैच ड्रॉ रहे।
गावस्कर ने कहा कि भारतीय क्रिकेट में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि जीत का श्रेय व्यक्तिगत प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मिलता है, लेकिन हार की जिम्मेदारी कप्तान और कोच पर डाल दी जाती है।
राहुल द्रविड़ से की रहाणे की तुलना
गावस्कर ने रहाणे की तुलना राहुल द्रविड़ से करते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन उन्हें हमेशा उतना सम्मान नहीं मिला जितना मिलना चाहिए था।
द्रविड़ की तरह रहाणे भी शांत स्वभाव, अनुशासन और टीम के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते रहे।
उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को उसके घर में हराना भारतीय क्रिकेट की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।
‘डूबते जहाज को संभाला’, गावस्कर ने की तारीफ
गावस्कर ने कहा कि एडिलेड टेस्ट में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद रहाणे ने टीम को संभाला।
उन्होंने रहाणे की कप्तानी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे समय में टीम का नेतृत्व किया जब हालात बेहद मुश्किल थे। कई बड़े खिलाड़ी चोट के कारण उपलब्ध नहीं थे, फिर भी भारत ने ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
रहाणे ने हमेशा टीम को रखा आगे
अजिंक्य रहाणे की पहचान एक शांत और भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में रही। उन्होंने कभी व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा टीम की सफलता को प्राथमिकता दी।
उनके योगदान में शामिल रहे—
- मुश्किल परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाना।
- युवा खिलाड़ियों को आत्मविश्वास देना।
- विदेशी दौरों पर महत्वपूर्ण पारियां खेलना।
- टीम के लिए कप्तानी की जिम्मेदारी उठाना।
क्रिकेट प्रेमियों ने दी भावुक विदाई
रहाणे के संन्यास के बाद क्रिकेट प्रशंसकों ने उनके योगदान को याद किया। गावस्कर के बयान ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि कई बार खिलाड़ियों की उपलब्धियों का सही मूल्यांकन समय रहते नहीं हो पाता।
अजिंक्य रहाणे भारतीय टेस्ट क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल रहेंगे, जिन्होंने दबाव के समय टीम को संभाला और देश को कई यादगार पल दिए। उनका करियर आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, धैर्य और नेतृत्व का उदाहरण रहेगा।







