नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC के शेयरों में मंगलवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। केंद्र सरकार द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद LIC Share शुरुआती कारोबार में करीब 8% तक लुढ़क गया। बाद में शेयर में कुछ रिकवरी आई, लेकिन फिर भी यह लगभग 6% की गिरावट के साथ कारोबार करता रहा।
बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह सरकार द्वारा OFS के लिए बाजार भाव से कम फ्लोर प्राइस तय करना माना जा रहा है। इस कदम के बाद निवेशकों की नजर अब इस बड़े विनिवेश पर टिकी हुई है।
क्यों गिरा LIC का शेयर?
केंद्र सरकार ने LIC में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लॉन्च किया है।
इस योजना के तहत सरकार—
- 2.5% मूल हिस्सेदारी बेचेगी।
- 4% तक ग्रीनशू विकल्प भी रखा गया है।
- कुल मिलाकर 6.5% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी है।
सरकार को इस बिक्री से 31,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की उम्मीद है।
कितना रखा गया फ्लोर प्राइस?
OFS के लिए सरकार ने ₹382 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है, जो उस समय के बाजार भाव से लगभग 10% कम था।
कम फ्लोर प्राइस की वजह से बाजार में बिकवाली बढ़ी और LIC के शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली।
कारोबार के दौरान क्या रहा हाल?
मंगलवार के कारोबार में—
- LIC का शेयर करीब 8% तक टूट गया।
- शेयर का इंट्राडे निचला स्तर लगभग ₹390.70 तक पहुंच गया।
- बाद में खरीदारी लौटने से गिरावट कुछ कम हुई।
- कारोबार के दौरान शेयर लगभग 6% की कमजोरी के साथ ट्रेड करता रहा।
मार्केट कैप पर पड़ा असर
शेयर में तेज गिरावट का असर कंपनी के बाजार पूंजीकरण (Market Cap) पर भी पड़ा।
गिरावट के बाद LIC का मार्केट कैप घटकर करीब ₹5.03 लाख करोड़ रह गया।
हालांकि, बाजार बंद होने तक अंतिम आंकड़े कारोबार के अनुसार बदल सकते हैं।
OFS कब तक खुला रहेगा?
सरकार का यह ऑफर फॉर सेल दो दिनों के लिए खुला है।
OFS का कार्यक्रम
- पहला दिन: गैर-खुदरा (Non-Retail) निवेशकों के लिए
- दूसरा दिन: खुदरा (Retail) निवेशकों के लिए
इस दौरान योग्य निवेशक तय फ्लोर प्राइस पर शेयरों के लिए आवेदन कर सकेंगे।
सरकार क्यों बेच रही है हिस्सेदारी?
सरकार का उद्देश्य केवल धन जुटाना ही नहीं, बल्कि न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding – MPS) के नियमों का पालन करना भी है।
फिलहाल LIC में सरकार की हिस्सेदारी लगभग 96.5% है। हिस्सेदारी बिक्री के बाद सार्वजनिक निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार OFS के दौरान शेयरों में उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है।
निवेशकों को—
- फ्लोर प्राइस और बाजार मूल्य के अंतर को समझना चाहिए।
- कंपनी के दीर्घकालिक प्रदर्शन पर भी नजर रखनी चाहिए।
- केवल एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना चाहिए।
- निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना उचित रहेगा।
OFS क्या होता है?
ऑफर फॉर सेल (OFS) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सूचीबद्ध कंपनियों के बड़े शेयरधारक, जैसे सरकार या प्रमोटर, अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा शेयर बाजार के जरिए निवेशकों को बेचते हैं।
इसका उद्देश्य—
- हिस्सेदारी कम करना,
- सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाना,
- और पूंजी जुटाना होता है।
बाजार की रहेगी नजर
LIC का यह OFS देश के सार्वजनिक क्षेत्र के इतिहास के सबसे बड़े विनिवेश कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है। यदि पूरी 6.5% हिस्सेदारी सफलतापूर्वक बिक जाती है, तो सरकार को 31,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हो सकती है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की प्रतिक्रिया, OFS की मांग और LIC के शेयर की चाल पर बाजार की विशेष नजर रहेगी। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कंपनी की सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ने के साथ शेयर में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।







