छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत को दो सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कई सरकारी स्कूलों में अब तक विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। इसका सबसे ज्यादा असर प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। किताबों की कमी के कारण शिक्षक और छात्र दोनों ही परेशानी का सामना कर रहे हैं।
बिलासपुर सहित प्रदेश के कई हिस्सों से किताबें नहीं मिलने की शिकायतें सामने आने के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। विपक्ष ने इसे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामी बताते हुए सरकार और शिक्षा विभाग पर सवाल उठाए हैं।
📚 बिना किताबों के शुरू हुई पढ़ाई
नए सत्र के शुरू होने के करीब 15 दिन बाद भी कई स्कूलों में बच्चों के हाथों तक पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंची हैं। ऐसे में:
- विद्यार्थी बिना किताबों के कक्षाओं में बैठने को मजबूर हैं।
- शिक्षक सीमित संसाधनों के सहारे पढ़ाई करा रहे हैं।
- अभिभावकों में बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।
- शुरुआती पाठ्यक्रम पूरा करने में दिक्कतें आ रही हैं।
विशेष रूप से प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के विद्यार्थियों पर इसका असर अधिक देखा जा रहा है।
🏫 शिक्षा विभाग के दावों पर उठे सवाल
हर साल नए सत्र से पहले समय पर पुस्तक वितरण के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस बार भी किताबों के वितरण में देरी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विपक्ष का कहना है कि यदि सत्र शुरू होने के बाद भी बच्चों को किताबें नहीं मिलतीं, तो इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया पर पड़ता है।
🗣️ कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
Indian National Congress के नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण हजारों छात्र-छात्राएं बिना पाठ्यपुस्तकों के पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
कांग्रेस ने अपनी मांगों में कहा है:
- सभी स्कूलों में जल्द से जल्द किताबें पहुंचाई जाएं।
- वितरण प्रक्रिया की समीक्षा की जाए।
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
- भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
📄 पाठ्य पुस्तक निगम ने क्या कहा?
इस मामले में संबंधित अधिकारियों का कहना है कि किताबों की छपाई में इस्तेमाल होने वाले कागज की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिली थीं। इसके बाद दोबारा टेंडर प्रक्रिया अपनानी पड़ी, जिससे वितरण में देरी हुई।
अधिकारियों के अनुसार:
- गुणवत्ता से समझौता नहीं किया गया है।
- नई प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुस्तकें भेजी जा रही हैं।
- जल्द ही सभी स्कूलों तक किताबें पहुंचा दी जाएंगी।
📌 अभिभावकों की बढ़ी चिंता
अभिभावकों का कहना है कि सत्र की शुरुआत में ही किताबें उपलब्ध नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई का महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो रहा है। कई परिवार निजी तौर पर किताबें खरीदने में सक्षम नहीं हैं और सरकारी वितरण का इंतजार कर रहे हैं।





