दिल्ली सरकार अगले दो से तीन साल के भीतर राजधानी में 7,000 किलोमीटर नई पानी की पाइपलाइन बिछाने की तैयारी में है। यह जानकारी जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पांचवें और आखिरी दिन सदन को दी। मंत्री ने कहा, “दिल्ली सरकार हर घर तक पीने का पानी पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। लेकिन आज जो परेशानी हम झेल रहे हैं, वह पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार की वजह से है।” प्रवेश वर्मा ने यह भी बताया कि वर्तमान सरकार ने पानी और सीवर सेक्टर में कुल 94 प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, ताकि राजधानी में जल आपूर्ति और नालियों की व्यवस्था में सुधार हो सके।
मंत्री ने कहा कि राजधानी में हर घर तक पीने का पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कई सदस्यों ने अपने क्षेत्रों में गंदा पानी आने की शिकायतें दी हैं। प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट किया कि पिछली सरकार की लापरवाही के कारण दिल्ली को एक जर्जर ढांचा विरासत में मिला है। राजधानी में लगभग 40 प्रतिशत पाइपलाइन जर्जर हैं, जिन्हें 30 साल से अधिक समय हो गया है। यही वजह है कि पानी लीकेज और गंदा पानी आने की समस्या बनी हुई है।
हमें जर्जर जल ढांचा विरासत में मिला
दिल्ली की वर्तमान सरकार ने जल विभाग की कमान एक ऐसी विकेट और उपेक्षित स्थिति में संभाली है, जो वर्षों की लापरवाही का परिणाम है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बताया कि राजधानी में कुल 16,000 किलोमीटर पानी की पाइपलाइन में से 5,200 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन 30 साल से अधिक पुरानी हैं। इसके अलावा, 2,700 किलोमीटर पाइपलाइन 20 से 30 साल पुरानी है। उनकी जर्जर अवस्था के कारण जगह-जगह पाइप फटना और रिसाव, पानी दूषित होने का खतरा, और 55 प्रतिशत तक पानी का नुकसान यानी कि नॉन रेवेन्यू वाटर (NRW) की हानि हो रही है। मंत्री ने कहा कि इन समस्याओं को दूर करने और हर घर तक साफ पानी पहुंचाने के लिए सरकार ने 94 प्रोजेक्ट शुरू किए हैं और अगले 2-3 साल में 7,000 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाने की योजना है।
24X7 स्वच्छ पानी देना हमारा संकल्प
दिल्ली सरकार को जल और सीवर सेक्टर में कई विरासत से मिली चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बताया कि 2011 से प्रस्तावित बड़े सुधार प्रोजेक्ट, जैसे चंद्रावल और वजीराबाद कमांड क्षेत्र, कई कारणों से वर्षों तक लंबित रहे। टेंडर रद्द होना और पुनः टेंडरिंग, फंडिंग एजेंसियों की आपत्तियाँ, इन वजहों से इन प्रोजेक्टों में भारी देरी हुई और लागत में वृद्धि हुई। परिणामस्वरूप लाखों नागरिक 24×7 स्वच्छ जल से वंचित रहे।
साथ ही, सीवर नेटवर्क से वंचित कॉलोनियों में सेप्टेज प्रबंधन पूरी तरह अनुपस्थित था। इसके चलते ओवरफ्लो सेप्टिक टैंकों का गंदा पानी नालों में बहकर यमुना को प्रदूषित कर रहा था और जल स्रोतों में मिक्सचर का गंभीर खतरा पैदा हो रहा था। जल मंत्री ने कहा कि कई दशकों से ट्रंक सीवरों की सफाई नहीं हुई, जिससे समस्या और गंभीर हो गई। उन्होंने यह भी बताया कि ये सभी समस्याएं वर्तमान सरकार पर विरासत में आई हैं, लेकिन सरकार इन चुनौतियों से पार पाने के लिए दृढ़ संकल्पित है और लगातार काम कर रही है।
दिल्ली सरकार ने पिछले 11 महीनों में पेयजल पाइपलाइन और जल आपूर्ति सुधार के लिए कई जनहित कदम उठाए हैं। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बताया कि वर्तमान सरकार की योजना के तहत पूरी राजधानी में हर घर तक 24×7 पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी।
दिल्ली को 6 जोन में बांटकर योजना पर होगा काम
दिल्ली सरकार की जल सुधार योजना के तहत राजधानी को छह जोन में विभाजित किया गया है:ईस्ट, नॉर्थ ईस्ट, नॉर्थ वेस्ट, वेस्ट, साउथ, और साउथ वेस्ट। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बताया कि पुराने डीपीआर के आधार पर नई योजना बनाई गई है और इसके लिए नए कंसल्टेंट की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
4,200 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन का प्रतिस्थापन, 54 नए UGR (अंडरग्राउंड रेसर्वॉयर) का निर्माण, 1,340 नए DMA (डिस्ट्रिक्ट मीटर एरिया) का निर्माण, 24×7 पानी की सप्लाई सुनिश्चित करना, नॉन रेवेन्यू वाटर (NRW) को 15 प्रतिशत तक कम करना, SCADA सिस्टम के जरिए निगरानी, जल मंत्री ने बताया कि इन कार्यों के पूरा होने से दिल्ली की कुल 16,000 किलोमीटर पाइपलाइन में से 7,000 किलोमीटर पाइपलाइन को आने वाले दो-तीन सालों में पूरी तरह बदल दिया जाएगा और नई पाइपलाइन डाल दी जाएगी।
राज्यों से चल रही बातचीत
दिल्ली सरकार अपनी जल आपूर्ति क्षमता बढ़ाने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ भी बातचीत कर रही है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बताया कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा से पीने का पानी देने को कहा गया है। बदले में इन राज्यों को सिंचाई के लिए ट्रीटेड पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था से राजधानी में लगभग 100 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रति दिन) पानी जुड़ जाएगा। जल मंत्री ने यह भी बताया कि पानी की गुणवत्ता सुधारने और गंदगी कम करने के लिए टूटी और पुरानी पाइपलाइन बदलने का काम पहले ही शुरू हो चुका है। इसके अलावा, पिछले 11 महीनों में दिल्ली सरकार ने 7,212 करोड़ रुपये के जल और सीवर प्रोजेक्ट लॉन्च किए हैं।
इसके तहत आने वाले दो-तीन सालों में 16,000 किलोमीटर की कुल पाइपलाइन में से 7,000 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिससे राजधानी में हर घर तक 24×7 साफ पानी पहुंच सके और नॉन रेवेन्यू वाटर (NRW) हानि 15 प्रतिशत तक कम हो। प्रवेश वर्मा ने यह भी बताया कि योजना के तहत दिल्ली को छह जोन में विभाजित किया गया है और 4,200 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन का प्रतिस्थापन, 54 नए UGR और 1,340 नए DMA बनाए जाएंगे। SCADA सिस्टम के जरिए इन सभी कामों की निगरानी होगी।









