January 5, 2026

Blog

Share Market Crash:साल 2026 की शुरुआत शेयर बाजार के निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। साल के पहले ही दिन केंद्र सरकार के एक चौंकाने वाले फैसले ने तंबाकू और सिगरेट सेक्टर में हड़कंप मचा दिया। वित्त मंत्रालय द्वारा एक्साइज ड्यूटी में भारी बढ़ोत्तरी के नोटिफिकेशन के बाद सिगरेट कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई। देखते ही देखते कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों के लगभग 60,000 करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। बाजार में आई इस सुनामी की मुख्य वजह वह टैक्स स्ट्रक्चर है, जिसने कंपनियों के मुनाफे और भविष्य की बिक्री (वॉल्यूम) पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

बाजार में आई इस गिरावट की जड़ में वित्त मंत्रालय का वह फैसला है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होने जा रहा है। सरकार ने सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी को बढ़ाने का कड़ा रुख अपनाया है। नए नियमों के मुताबिक, सिगरेट की लंबाई और उसकी श्रेणी के आधार पर प्रति 1000 स्टिक पर 2050 रुपये से लेकर 8500 रुपये तक की अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी वसूली जाएगी। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह भारी टैक्स पहले से लागू 40% GST के ऊपर से लगाया जाएगा, जिससे सिगरेट की अंतिम कीमत में भारी उछाल आना तय है।

सरकार के इस फैसले का सबसे सीधा और घातक असर देश की दिग्गज कंपनी ITC पर देखने को मिला। सिगरेट बाजार में करीब 75% हिस्सेदारी रखने वाली ITC के शेयरों में 9.7% की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह मार्च 2020 (लॉकडाउन की शुरुआत) के बाद कंपनी के लिए सबसे खराब एकदिनी गिरावट रही। वहीं, गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया (Godfrey Phillips India) की स्थिति और भी गंभीर रही, जिसका शेयर 17% से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा वीएसटी इंडस्ट्रीज और एनटीसी इंडस्ट्रीज जैसी अन्य छोटी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली और बिकवाली की।

ब्रोकरेज हाउसों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी टैक्स बढ़ोत्तरी का असर सीधे कंपनियों के सेल्स वॉल्यूम पर पड़ेगा। नुवामा इंस्टीट्यूशनल रिसर्च के एक विश्लेषण के अनुसार, जब भी टैक्स में ऐसी अस्वाभाविक वृद्धि हुई है, सिगरेट की बिक्री में 3% से 9% तक की गिरावट देखी गई है। जेफरीज की रिपोर्ट बताती है कि इस अतिरिक्त टैक्स का बोझ वहन करने के लिए ITC जैसी कंपनियों को सिगरेट की कीमतों में कम से कम 15% की बढ़ोत्तरी करनी होगी। यदि कीमतें इतनी ज्यादा बढ़ती हैं, तो आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ेगा और मांग में कमी आ सकती है।

इतने बड़े झटके के बावजूद, कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स अब भी सकारात्मक नजरिया रख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि ITC के पास केवल सिगरेट ही नहीं, बल्कि FMCG, होटल्स और एग्रो-बिजनेस का एक मजबूत पोर्टफोलियो है। फिसडम के विशेषज्ञों का मानना है कि अपने मजबूत ब्रांड वैल्यू और बेहतर मार्जिन के कारण ITC इस दबाव को धीरे-धीरे झेल लेगी। हालांकि, उन कंपनियों के लिए रास्ता मुश्किल होगा जिनका पूरा रिवेन्यू केवल तंबाकू उत्पादों पर निर्भर है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट से पहले आया यह फैसला बाजार की दिशा को किस ओर मोड़ता है।

About The Author

error: Content is protected !!