रायपुर/बस्तर। बस्तर ओलंपिक के आयोजन से स्थानीय युवाओं में नए युग का आगाज हुआ, देशभर ने स्थानीय युवाओं की हुनर को देखा, यह सब विष्णुदेव साय की पहल से ही संभव हो पाया है।
बस्तर के युवाओं में असाधारण प्रतिभा है। खेल जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। विष्णुदेव सरकार का उद्देश्य है कि बस्तर के हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को एक बेहतर मंच मिले और बस्तर ओलंपिक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
युवाओं में खेल भावना का विकास समाज को मजबूत बनाता है। स्वस्थ तन और स्वच्छ मन के लिए खेल अत्यंत आवश्यक हैं। यहां के खिलाड़ी जिस मेहनत और समर्पण के साथ खेल रहे हैं, वह आने वाले समय में उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगा।
बस्तर ओलंपिक ने बस्तर के विकास की यशोगाथा और शांति, सुरक्षा, विकास और नई उम्मीद की नींव डालने का काम किया। बस्तर ओलम्पिक के माध्यम से साय सरकार बस्तर अंचल के युवाओं की ऊर्जा को खेल के माध्यम से एक सकारात्मक दिशा देने में सफल रहे हैं।
बस्तर ओलंपिक का यह आयोजन केवल खेल नहीं है, बल्कि बस्तर की संस्कृति, उत्साह, और प्रतिभा का उत्सव है। यह आयोजन एक संदेश देता है कि बस्तर का असली चेहरा इसकी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता है, न कि माओवाद की हिंसा।
आज जब लाखों युवा इस ओलंपिक में भाग लेते हैं और अपनी ऊर्जा को खेलों में लगाते हैं, तो यह एक सुखद संकेत है। बस्तर ओलम्पिक का सफल आयोजन लोगों में विश्वास दिलाता है कि बस्तर के युवाओं की क्षमता और उनकी शक्ति को अगर सही दिशा में प्रेरित किया जाए, तो विकास और खुशहाली का रास्ता कोई नही रोक सकता है।
मुख्यमंत्री साय ने बस्तर ओलंपिक के आयोजन को लेकर कहा कि इस आयोजन के माध्यम से हमने न केवल बस्तर के युवाओं की छुपी प्रतिभा को देखा, बल्कि उन आत्मसमर्पित भाइयों और बहनों की प्रतिभा को भी देखा, जिन्होंने हिंसा की माओवादी विचारधारा को छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की।
नक्सलवाद का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि शिक्षा, खेल, रोजगार और सकारात्मक अवसर प्रदान करने से होगा और बस्तर ओलंपिक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आज आपके चेहरों पर जो मुस्कान है, वह एक खुशहाल और शांतिपूर्ण बस्तर का प्रतीक है।
आगे उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा से प्रभावित दिव्यांगजन भी इन खेलों में हिस्सा ले रहे है। उनकी हिम्मत और जज्बा ने दिखा दिया है कि बस्तर के लोग कभी हार नहीं मानते।
बस्तर ने लम्बे समय से माओवाद के दंश को झेला है। लेकिन आज, बस्तर शांति और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि हर संभव सहयोग के कारण संभव हो पाई है।
बस्तर ओलंपिक में बच्चों-युवाओं ने उत्साह से हिस्सा लिया, और बुजुर्गों ने भी इन खेलों का आनंद लेकर अपने बचपन और स्कूली जीवन की यादें ताजा कीं।
बता दें कि पिछले दिनों बस्तर ओलंपिक में 300 से अधिक नुवा बाट (आत्म समर्पित माओवादी) ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। इसके साथ ही 18 से अधिक माओवादी हिंसा में प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ी भी शामिल हुए थे।
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