रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में 22 से अधिक निजी पैरामेडिकल कालेज संचालित हैं। जहां 20 हजार से अधिक छात्रों का भविष्य अधर में है। इन कालेजों में छात्रों को गुमराह कर प्रवेश दिया जा रहा है। प्रशासनिक संरक्षण की वजह से चिकित्सा शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासन तक इनपर कार्रवाई नहीं कर रही है। मामले में जोगी कांग्रेस युवा मोर्चा ने राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री तक शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। बता दें प्रदेश में किसी भी तरह के मेडिकल कोर्स के लिए आयुष विश्वविद्यालय ही मान्यता देता है। लेकिन राज्यभर में लैब अटेंडेंट, ओटी टेक्नीशियन, ड्रेसर, एक्सरे टेक्नीशियन आदि पैरामेडिकल कोर्स के नाम पर ऐसे संस्थान संचालित हो रहे हैं, विश्वविद्यालय की मान्यता है ना शासन को किसी प्रकार की सूचना।
प्रवेश के बाद यहां छोटे से कमरे में पढ़ाई कराई जाती है, जहां ना तो व्यवस्था है और ना ही स्टाफ। वहीं परीक्षा के लिए दूसरे राज्य भेजे जाते हैं। इन संस्थानों के द्वारा विगत तीन से पांच वर्षों में एक भी परीक्षाएं आयोजित नहीं की गई है। ऐसे हालात में तंग आकर छात्र व छात्र अपनी पढ़ाई अधूरा छोड़ आत्महत्या तक को मजबूर हो रहे हैं। जोगी कांग्रेस के राजा राज बंजारे, नावेद कुरैशी, अविनाश साहू, तरुण सोनी, राज नायक ने बताया कि मामले की शिकायत शासन स्तर पर की गई है।
प्रदेश के सिर्फ इन सात निजी संस्थानों को पैरामेडिकल कोर्स की मान्यता
-चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल हास्पिटल, भिलाई
-रायपुर इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस, भानसोज, रायपुर
-श्री बालाजी इंस्टीट्यूट आफ पैरामेडिकल मोवा, रायपुर
-श्री शंकराचार्य इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंस, जुनवानी, भिलाई
-वीवाय इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल सांइसेस, रायपुर
-किश्चयन पैरामेडिकल कालेज धमतरी
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