नई दिल्ली :- आज के इस दौर में स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी चीज के साथ समझौता करना आपके लिए भारी पड़ सकता है। किसी बीमारी से हमको ठीक करने में दवाओं का महत्वपूर्ण योगदान होता है। हालांकि, आज के समय कई मेडिकल स्टोर पर असली के नाम पर नकली दवाओं की बिक्री काफी तेजी से हो रही है। बाजार में जिस तेजी से नकली दवाओं की उपलब्धता बढ़ रही है वह काफी चिंता का विषय है। इन खराब गुवणत्ता वाली दवाओं को खाने से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
ये दवाएं दिखने में हूबहू असली जैसी होती हैं। इनकी पहचान कर पाना काफी मुश्किल होता है। इस कारण कई बार एक आम ग्राहक असली और नकली दवाओं के बीच पहचान नहीं कर पाता है। इसी सिलसिले में आज इस खबर के माध्यम से हम आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप असली और नकली दवाओं की पहचान कर सकते हैं।
आप पैकेजिंग देखकर दवाओं की वास्तविकता के बारे में पता कर सकते हैं। नकली दवाओं की पैकेजिंग ठीक ढंग से नहीं होती है। अक्सर नकली दवाओं की पैकेजिंग टेढ़ी-मेढ़ी छपी हुई या सस्ती क्वालिटी की दिखती है। इसके अलावा स्पेलिंग में गलती या ब्रांड के नाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
ब्रांडेड दवाओं पर अब क्यूआर कोड या बारकोड बना हुआ आता है। आप अपने स्मार्टफोन से स्कैन करके दवाओं की डिटेल और कंपनी के बारे में जान सकते हैं। नकली दवाओं में इस तरह के क्यूआर कोड या बारकोड नहीं होते हैं। दवा खरीदने के बाद आपको उसका वास्तविक बिल जरूर लेना चाहिए। अगर दुकानदार बिल देने से मना कर रहा है तो उस मेडिकल स्टोर पर नकली दवाओं के बिकने की संभावना ज्यादा हो सकती है। इसके अलावा दवाओं को लेने के बाद उसे अपने डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
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