जांजगीर :- समाज में बेटियों को लेकर बनी रूढ़ियों को तोड़ते हुए नवागढ़ क्षेत्र के केरा गांव में चार बेटियों ने एक मिसाल पेश की है। बुजुर्ग मां जमुना मनहर के निधन के बाद उनकी बेटियों ने न सिर्फ मां की अर्थी को कंधा दिया बल्कि पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार की सभी विधियां भी संपन्न कीं। केरा गांव निवासी जमुना मनहर के चार बेटियां और दो बेटे हैं। आम धारणा के विपरीत जमुना देवी अपने बेटों के साथ न रहकर अपनी बेटियों के पास ही निवास करती थीं। बेटियों ने ही वर्षों तक उनकी देखभाल की इलाज करवाया और सेवा-सुश्रुषा में कोई कमी नहीं छोड़ी।
मां के निधन के बाद बेटियों ने यह निर्णय लिया कि वे ही अपनी मां की अंतिम यात्रा की जिम्मेदारी उठाएंगी। उन्होंने खुद एंबुलेंस को फूलों से सजाया, मां के शव को घर लाया और फिर परंपरा से हटते हुए मां की अर्थी को कंधा दिया। यही नहीं चारों बेटियों ने मिलकर अंतिम संस्कार की सभी विधियों को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाया।
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