नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को भारत के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ पारदर्शी और सहयोगात्मक संवाद की आवश्यकता पर जोरदेते हुये कहा कि राज्यों के साथ ईमानदारी से बातचीत होनी चाहिए।
श्री सीतारमण ने यहां एक शिखर सम्मेलन में कहा, “ राज्यों के साथ ईमानदारी से बातचीत होनी चाहिए। आपको लगता है कि संस्थागत व्यवस्था से आपको वांछित परिणाम मिलेंगे। लेकिन जीएसटी परिषद की स्थापना में भी प्रयास गहन और निरंतर थे। मुझे लगता है कि राज्यों के साथ बातचीत पहले होनी चाहिए।”
उन्होंने स्पष्टता और सहयोग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जैसे जेंडर के सवाल का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उसी तरह से पैसे या कर हस्तांतरण कैसे होता है, इस बारे में जनता को गलत जानकारी देने का कोई भी प्रयास राष्ट्र के लिए नुकसानदेह है क्योंकि कर्म भविष्य की पीढ़ियों पर बोझ है।
फ़ायरसाइड चैट के दौरान इस बारे में पूछे जाने पर कि क्या संस्थागत ढांचा राज्यों के बीच राजकोषीय असमानताओं को दूर कर सकता है,श्रीमती सीतारमण ने कहा कि जीएसटी परिषद जैसी संरचनाओं के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता है, लेकिन इसकी नींव वास्तविक राज्य-स्तरीय भागीदारी पर आधारित होनी चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या संरचनात्मक मुद्दों को दूर करने के लिए अतिरिक्त नीतिगत उपायों की आवश्यकता है, उन्होंने कहा “ इस स्तर पर नहीं। हमने जिन सुधार उपायों की घोषणा की है, उन्हें अभी कुछ और करना है। आयकर विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद हमें तेजी से आगे बढ़ना होगा। हमें एक अप्रैल के बाद तेज गति से आगे बढ़ना होगा।” उन्होंने निर्यात संवर्धन, करदाता सम्मान, आयकर सरलीकरण और सीमा शुल्क में चल रहे सुधारों पर प्रकाश डाला और इनके क्रियान्वयन में विश्वास व्यक्त किया। भारत की ‘ विकास कहानी’ के सामान्य होने की धारणा पर, श्रीमती सीतारमण ने चालू तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में संभावित स्थिरता का संकेत दिया लेकिन इसे अंतिम बिंदु के रूप में खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “ वैश्विक स्तर पर सभी चुनौतियों के बावजूद, भारत विकास के साथ आगे बढ़ रहा है।”
निवेश पुनरुद्धार में कॉर्पोरेट क्षेत्र की भूमिका को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने उद्योग जगत पर जिम्मेदारी डालते हुए कहा “इसका जवाब उद्योग जगत से आना चाहिए। हमें बताएं कि अगर आप ‘निवेश’ नहीं कर रहे हैं तो क्यों नहीं, अगर कर रहे हैं तो हमें बताएं। लेकिन जवाब क्यों नहीं।”
सीमा शुल्क टैरिफ युक्तिकरण पर उन्होंने कहा “ हम चाहते हैं कि कुछ उत्पाद भारत में आएं क्योंकि विनिर्माण इस पर निर्भर करता है। अगर इससे हमारे विनिर्माण में मदद मिलती है तो हम देश में आने वाले उत्पादों को सक्षम बनाएंगे।”
विनिवेश और निजीकरण पर श्रीमती सीतारमण ने कहा कि 2021 से, मुख्य क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया गया है, जिसमें सभी क्षेत्रों में प्रवेश के लिए कोई बाधा नहीं है।
वित्त मंत्री ने 2019 से विनियमन-मुक्ति प्रयासों को भी रेखांकित किया, जिसमें लगभग 1,600 पुराने कानूनों को हटाना और ओवरलैपिंग विनियमों को सुव्यवस्थित करना शामिल है। उन्होंने कहा, “हम इसे साफ करना चाहते थे ताकि हर कोई अपने लिए काम करने के बजाय एक बड़े पहिये के हिस्से के रूप में काम करे।”
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