सुप्रीम कोर्ट ने सख्त हिदायद दी कि निचली अदालतों के लिए मुकदमों की जल्दी सुनवाई के लिए हाई कोर्ट समय सीमा तय कर रहे हैं और सिर्फ इस आधार पर जमानत देने से इनकार सही नहीं है. कोर्ट ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है क्योंकि इस तरह की समयावधि निर्धारित करना असाधारण मामलों में ही तय किया जाना चाहिए.
गौरतलब है कि फरवरी में न्यायमूर्ति ओका की अध्यक्षता में संविधान पीठ के फैसले में कहा गया था कि अदालतों को किसी अन्य अदालत में लंबित मामलों के लिए समयबद्ध कार्यक्रम निर्धारित करने से बचना चाहिए. न्यायमूर्ति ओका की पीठ ने फरवरी में दोहराया था कि हाई कोर्ट भी संवैधानिक न्यायालय हैं और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के अधीनस्थ नहीं माना जा सकता. अगस्त में एक अन्य पीठ ने भी कहा था कि वह हाई कोर्ट को समयबद्ध तरीके से मामलों की सुनवाई करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती.
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