गरियाबंद। उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व के रिसगांव (कोर) परिक्षेत्र ओडिशा सीमा के समीप पश्चिम जोरातराई बीट अंतर्गत सोंदूर नाले का औचक निरिक्षण के दौरान एक शिकारी को पेट्रोलिंग-एन्टी पोचिंग दल (उपनिदेशक वरुण जैन, परिक्षेत्र अधिकारी चन्द्रबली ध्रुव, परिक्षेत्र सहायक रिस्गांव महेंद्र चौहान एवं 2 पेट्रोलिंग श्रमिक) द्वारा इंटरसेप्ट किया गया जो कि खरपतवार से निर्मित हाईडआउट (छुपकर तीर, गुलेल मारने, जाल बिछाने वाले स्थान) में बैठकर जाल बिछाकर पक्षियों का शिकार कर रहा था। दल को देखकर शिकारी मौके से घने जंगल में भागकर फरार हो गया जिसकी पतासाजी की जा रही है। मौके से दो हरियल पक्षियों को रेस्क्यू किया गया, पक्षियों को पकड़ने के लिए बनाया गया फंदा जप्त किया एवं हाईडआउट को नष्ट किया गया । गर्मियों के समय अधिकांश जल स्तोत्र सूख जाते है तब शिकारियों द्वारा बचे हुए जल स्त्रोतों पर घात लगाकर जंगली जानवरों एवं पक्षियों का शिकार खेला जाता है। ग्रीष्म ऋतू को देखते हुए जल स्त्रोतों की निगरानी के लिए पेट्रोलिंग स्क्वाड को निर्देशित किया गया है ताकि शिकारियों को मौके से ही intercept किया जा सके एवं फंदों, हाईड-आउट्स को नष्ट किया जा सके ।

मध्य-प्रदेश के एन्टी पोचिंग एक्सपर्ट ने बताया कि शिकारी द्वारा क्या क्या तरीके अपनाए जाते है शिकार के लिए :-
जब दो हरियल पक्षियों को रेस्क्यू किया तब उनमे से एक पक्षी की आँख के अन्दर वाली खाल को ऊपर लाकर अँधा (temporarily) बना दिया गया था एवं उसका 1 पंच भी आधा काट दिया गया था और उसके पैर, पंख बाँध दिए गये थे। जो कि पेट्रोलिंग दल ने समझने की कोशिश की कि ऐसा क्यों किया गया होगा। जब एन्टी पोचिंग एक्सपर्ट से विडियो शेयर किया गया तब उन्होंने बताया कि अन्य पक्षियों को आकर्षित करने के लिए ऐसा किया जाता है और दाना पानी का उपयोग भी किया जाता है ताकि एक बार में ही ज्यादा से ज्यादा पक्षी कैद हो सके। इन पक्षियों का ज्यादातर उपयोग खाने के लिए किया जाता है।

टाइगर रिज़र्व / अभ्यारण्य/वन क्षेत्रो में पक्षियों का शिकार खेलने वालो पर एवं अनधिकृत प्रवेश पर कम से कम तीन साल की कैद का प्रावधान है और यह एक गैर जमानती अपराध है। ग्रीष्म ऋतू के समय टाइगर रिज़र्व में ट्रेसपासर्स पर तत्काल कारवाई करने के निर्देश दिए गये है।
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