Adani group stocks: जनवरी महीने में अमेरिका की शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद से गौतम अडानी ग्रुप की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बीते कुछ महीनों में अडानी ग्रुप को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब फाइनेंशियल टाइम्स (एफटी) की ताजा रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अडानी ग्रुप ने कोयले के आयात बिल को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और कोयले से जनरेट होने वाली बिजली ग्राहकों तक अधिक कीमत पर पहुंचाई गई।
इस ताजा रिपोर्ट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अडानी और हिंडनबर्ग मामले में सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 20 अक्टूबर 2023, शुक्रवार को करेगा। अडानी ग्रुप को लेकर निगेटिव रिपोर्ट का असर इसकी लिस्टेड कंपनियों पर दिखा और शेयर बुरी तरह बिखर गए।
क्या है आरोप: फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में जनवरी 2019 से अगस्त 2021 के बीच के जांच का हवाला दिया गया है। इस जांच में मीडिया कंपनी ने पाया कि अडानी समूह ने कथित तौर पर 30 शिपमेंट में अपने आयातित कोयले की कीमत को 73 मिलियन डॉलर तक बढ़ा दी थी। आरोप है कि जब 30 शिपमेंट भारत के लिए रवाना हुए तो उनकी निर्यात कीमत 139 मिलियन डॉलर के करीब थी। हालांकि, भारत पहुंचते ही इस 30 शिपमेंट को 215 मिलियन डॉलर के आयात मूल्य के तौर पर जानकारी दी गई, जो मूल कीमत से 52 प्रतिशत ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक इसका सीधा मकसद भारत में बढ़ी हुई कीमत को जस्टिफाई करना था। इसका भुगतान भी किया गया तो समूह के ही सीक्रेट शेयरधारक इससे लाभान्वित हुए। इस भुगतान के जरिए अडानी समूह की संभवत: यह भी मंशा थी कि किसी तरह के सवाल ना उठ सकें और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए आधार रहे।
सीक्रेट शेयरधारकों को लाभ: रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इसका लाभ अडानी समूह को सीधे तौर पर नहीं मिला बल्कि तीन बिचौलिये-दुबई में टॉरस कमोडिटीज जनरल ट्रेडिंग, ताइपे में हाय लिंगोस और सिंगापुर में पैन एशिया ट्रेडलिंक इससे लाभान्वित हुए। ये अडानी समूह के सीक्रेट शेयरधारक हैं। बता दें कि अगस्त में ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी) की रिपोर्ट में भी हाय लिंगोस के मालिक चांग चुंग-लिंग का जिक्र था, जिसे सीक्रेट शेयरधारक के तौर पर पहचान दी गई है।
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